संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। हथनीकुंड बैराज पर मंगलवार को मानसून सीजन का अब तक का सबसे अधिक जलप्रवाह दर्ज किया गया। दोपहर तीन बजे बैराज पर पानी की आवक बढ़कर 79,630 क्यूसेक पहुंच गई।
बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने बैराज के 18 में से 15 गेट खोलकर 63,110 क्यूसेक पानी यमुना नदी, पश्चिमी यमुना नहर में 14510 क्यूसेक और यूपी की पूर्वी यमुना नहर में 2010 क्यूसेक पानी पानी छोड़ा। जलप्रवाह बढ़ने के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है।
शाम छह बजे तक बैराज पर पानी की आवक घटकर 52,519 क्यूसेक और सात बजे 48,064 क्यूसेक रह गई, लेकिन हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले घंटों में जलस्तर दोबारा बढ़ने की संभावना जताई गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
सोमवार को दिन में बैराज पर अधिकतम 42,778 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था। सोमवार रात 12 बजे हथनीकुंड बैराज पर 23,902 क्यूसेक पानी की आवक थी। इसके बाद रात दो बजे जलप्रवाह बढ़कर 26,358 क्यूसेक पहुंच गया। तड़के चार बजे 25,458 क्यूसेक, सुबह छह बजे 24,315 क्यूसेक और आठ बजे 25,030 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।
सोम और पथराला नदी में भी बढ़ा जलस्तर
कैचमेंट एरिया में हुई बारिश के कारण सोम और पथराला नदी में भी पानी का बहाव बढ़ गया। मंगलवार को सोम नदी में 10,620 क्यूसेक और पथराला नदी में 5,760 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के अनुसार हथनीकुंड बैराज से जब एक लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा जाता है तो मिनी फ्लड जैसी स्थिति मानी जाती है।
अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। यमुना के निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने की अपील की गई है। - विजय गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।