संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। तीन राज्यों को पानी सप्लाई करने वाले हथिनीकुंड बैराज जल संकट से जूझ रहा है। वीरवार शाम पांच बजे यहां मात्र 2254 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। यह न्यूनतम से भी काफी कम है। हालांकि सुबह छह बजे यहां 7830 क्यूसेक पानी रहा। वहीं कई दिनों से दिल्ली को पानी देने को लेकर हिमाचल प्रदेश व हरियाणा में बैठकों का दौर जारी है। हिमाचल प्रदेश के पास पर्याप्त पानी न हो पाने से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह मामला ठंडा बस्ती में चला गया।
तीन राज्यों में पानी का बंटवारा करने वाले हथिनीकुंड बैराज पर पहाड़ों में बारिश न होने से पानी की किल्लत का अधिक सामना करना पड़ रहा है। बारिश न होने से जल संकट गहराने लगा है। हालांकि बुधवार रात को मौसम में कुछ परिवर्तन आया है। बीती रात पहाड़ों व मैदानी क्षेत्र में बारिश हुई है। बारिश के कारण ही सुबह यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन उसके बाद पानी की कमी हो गई।
यदि ऐसे हालात रहे तो प्रदेश सहित दिल्ली व उत्तर प्रदेश में भयंकर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। हथिनीकुंड बैराज पर दो दशक में कभी इतना जल संकट देखने को नहीं मिला। जानकारों की माने तो इस बार भयंकर गर्मी पड़ रही है, लेकिन बारिश नहीं हुई। गर्मी से बर्फ पिंघल रही है, जिससे यमुना में पानी पहुंच रहा है, लेकिन बारिश होना जरूरी है। बारिश होने के बाद ही स्थिति में सुधार आएगा।
बैराज के गेज रीडर शेर सिंह ने बताया कि वीरवार शाम 5:00 बजे 2254 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। हालांकि सुबह 6:00 बजे 7830, सुबह सात बजे 7625, आठ बजे 7274, नौ बजे 4947, दस बजे 4619, सुबह 11:00 बजे 5003, दोपहर 12:00 बजे 4895 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जबकि दोपहर एक बजे 4326, दो बजे 3627, चार बजे 1704, पांच बजे 2254 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिसमें से पश्चिम नहर को 1759, यमुना को 352 में यूपी को 153 पानी दिया गया है।