यमुनानगर। नई वार्डबंदी से नगर निगम यमुनानगर जगाधरी के अंतर्गत पुराने बूथ व वोट वार्डों में इधर-उधर हो गए हैं, ऐसे आरोप लगाते हुए पूर्व व निवर्तमान पार्षदों सहित अन्य लोग मतदाता सूची ड्राफ्ट पर आपत्तियां दे चुके हैं, वहीं अब दावे-आपत्तियों बाद वार्ड वाइज जारी मतदाता सूची के अपडेट ड्राफ्ट में वर्ष-2018 के चुनाव से वार्डों में पोलिंग बूथ से लेकर वोटर की संख्या में अंतर नजर आ रहा है।
वार्ड दो, 15 व 19 में पिछले चुनाव से वोटर घटे दिख रहे हैं, जबकि अन्य 19 वार्डों में 464 से लेकर 4824 तक वोटर बढ़े नजर आ रहे हैं। इस तरह वोटर घटने-बढ़ने के साथ कई वार्ड पिछले चुनाव से अलग वर्ग में आरक्षित हो गए हैं। दोनों वजह से कई वार्डों में पार्षद चुनाव के समीकरण बदल रहे हैं।
कई अपने वार्ड में नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, दूसरे वार्डों पर निगाहें
वार्ड एक पिछले चुनाव में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहा। यहां से निवर्तमान पार्षद संजय राणा दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, पर इस बार वार्ड एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने से वह यहां से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। ऐसे ही लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले निवर्तमान पार्षद देवेंद्र सिंह को तीसरी बार चुनाव लड़ना था, पर उनका वार्ड चार बीसीए महिला आरक्षण हो गया। ऐसे ही निवर्तमान पार्षद सुरेंद्र शर्मा का वार्ड दस बीसी-बी वर्ग, निवर्तमान पार्षद प्रिंस शर्मा का वार्ड-15 सामान्य महिला, निवर्तमान पार्षद कुसुम लता का वार्ड सामान्य वर्ग, निवर्तमान पार्षद अभिषेक मौदगिल का वार्ड एससी महिला के आरक्षित हो गया है।
इस तरह कइयों की वर्षों पुरानी वार्डों में जमी राजनीतिक जमीन हिल गई है। कई ऐसे भी हैं, जिनके परिवार के लोग नगर निगम से पहले परिषद के समय में भी पार्षद रह चुके है हैं। कई पूर्व व निवर्तमान पार्षद शहर की राजनीति में खुद व परिवार के वर्षों पुराने वर्चस्व को कायम रखने के लिए अपना वार्ड अलग वर्ग में आरक्षित होने के बाद से खुद या परिवार के किसी सदस्य को दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ाने के लिए प्रचार शुरू कर दिया है।