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Yamuna Nagar News: थर्मल पावर प्लांट से उड़ने वाले कोयले के कणों से ग्रामीणों को मिलेगी निजात

Mon, 08 Jul 2024 05:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट की राख से आसपास गांव के ग्रामीणों को जल्द निजात मिल सकेगी। इसके लिए प्रबंधन की ओर से विंड मैस (प्लास्टिक की जाली) लगाई जा रही है, जिससे हवा तो बाहर जा सकेगी, लेकिन कोयले के कण इसे पार नहीं कर सकेंगे। साथ ही वाटर कैनन की भी व्यवस्था की गई है, जिसकी बौछार से कोयले के कणों व राख को नियंत्रित किया जा सकेगा।
दरअसल, थर्मल पावर प्लांट में 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाने से पहले आसपास के 15 गांवों को जनसुनवाई के लिए बुलाया गया था। इसमें डीसी के समक्ष ग्रामीणों ने कोयले की राख उड़ने से होने वाली परेशानी को लेकर आवाज उठाई थी। साथ ही प्रभावित गांव के ग्रामीणों को अन्यत्र शिफ्ट कराने की गुहार लगाई थी। इसके बाद प्लांट प्रबंधन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके तहत सर्वाधिक प्रभावित रतनपुरा और कयामपुर गांवों की तरफ प्लांट की दीवार के ऊपर 30 फीट तक विंड मैस को क्रेनों के माध्यम से लगाने का कार्य किया जा रहा है। वहीं वाटर कैनन से प्लांट के अंदर पड़े कोयला के कणों को दबाने के लिए पानी की बौछार की जा रही है।
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अब तक नहीं ली सुध, अब नई यूनिट से पहले कर रहे एहतियाती उपाय
उल्लेखनीय है दीनबंधु छोटू राम थर्मल पॉवर प्लांट के अंदर 409.242 हेक्टेयर (1011.26 एकड़) भूमि के अंदर 5352.75 करोड़ से 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाने की योजना है, जबकि मौजूदा समय में 300-300 यानी 600 मेगावाट की यूनिट पहले से स्थापित है, जो कोयला आधारित बिजली संयंत्रो में से एक है। जिसे 2005-2008 में विकसित किया गया था। किंतु इस 600 मेगावाट यूनिट के स्थापित होने के बाद खुले में पड़े कोयले के कणों से थर्मल के निकटवर्ती गांव के ग्रामीणों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी हैं। कोयले के कणों से परेशान कई बार लोग स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक का दरवाजा खटखटा चुके, लेकिन बात नहीं बनी। अब जब नई 800 मेगावाट यूनिट लगाने की परियोजना आई और जनसुनवाई में लोगों ने आवाज उठाई तो विंड मैस व वाटर कैनन के कार्य को शुरू कर दिया गया।
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हमने कोयले के कणों को दबाने के लिए विंड मैस की दीवार बनाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा हवा से कोयले के कण उड़ न सकें, इसके लिए अलग से वाटर कैनन की व्यवस्था की गई है। अब रोजाना वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कोयले के कण दब जाएंगे, जिससे ग्रामीणों को दिक्कत नहीं होगी। - राजीव गुप्ता, चीफ इंजीनियर, थर्मल पॉवर प्लांट यमुनानगर।
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