पांजूपुर गांव के ग्रामीणों की दान दी हुई भूमि पर गुरु तेग बहादुर साहिब राजकीय मेडिकल काॅलेज बनकर तैयार होगा। कॉलेज करीब 21 एकड़ भूमि में बनेगा। इस पर 1200 करोड़ रुपये की लागत आएगी और 30 माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाना है। खास बात ये होगी इसमें एमबीबीएस स्तर के डॉक्टर्स तैयार होंगे। वहीं बनने वाले इस कॉलेज में 500 बेड का एक बड़ा अस्पताल भी होगा। साथ ही नर्सिंग कॉलेज, फिजियोथैरिपी कॉलेज के अलावा नर्सिंग होस्टल और लड़कों का होस्टल भी बनेगा। इसके बनाने का ठेका सरकार ने ब्रिज एंड रूफ कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। उल्लेखनीय है मुख्यमंत्री ने 29 मई 2022 को पांजूपुर में गुरु तेगबहादुर मेडिकल काॅलेज की स्थापना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर को मंजूरी दी थी। इससे पहले 21 सितंबर 2021 को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग और एजेंसी के बीच एमओयू साइन हुआ था।
बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज में 18 प्रकार की आधुनिक सुविधाएं होंगी। यहां मेडिकल काॅलेज बनने का लाभ जिले के लोगों के साथ-साथ आसपास के राज्य उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के लोगों को भी होगा। दोनों प्रदेशों की सीमा जिला यमुनानगर से मिली है। अभी भी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से काफी संख्या में मरीज यमुनानगर इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही मेडिकल काॅलेज बनने से स्थानीय नागरिक अस्पताल में भी सुविधा बढ़ेगी। वहीं मेडिकल कॉलेज बनने से जिले के अस्पतालों में रेफर केसों में भी कमी आएगी। क्योंकि अभी तक आपातकालीन केस को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया जा रहा है। ऐसे में अगर केस रेफर करना भी होगा तो इस कॉलेज में किया जा सकेगा।
बता दें दो बार बजट सत्र में इसकी घोषणा हो चुकी है। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन जिला सिविल अस्पताल से 10 किलोमीटर के एरिया में होनी चाहिए थी। यह मेडिकल कॉलेज 500 बेड का होगा। इसमें मेडिकल की पढ़ाई के लिए 100 सीटें निर्धारित होंगी। कॉलेज बनने के बाद छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। वहीं यह मेडिकल कॉलेज 30 माह के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। इतना ही नहीं कॉलेज तक आने के लिए सामने से गुजर रही सड़क का भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था भी होगी ताकि वाहन सड़क पर खड़े हो न सके।