जठलाना। यमुना नदी के नगली घाट पर दो राज्यों को जोड़ने वाले ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में अनियमितताओं की शिकायत पर वीरवार को विजिलेंस की टीम चंडीगढ़ से पहुंची। विजिलेंस अधिकारी जय सिंह के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंच कर निर्माण सामग्री के नमूने लिए, जिन्हें जांच के लिए साथ ले जाया गया। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता यमुनानगर निवासी चिराग सिंघल की शिकायत पर की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि ओवरब्रिज का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में शुरू हुआ था और इसे 2021 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक भी निर्माण अधूरा है। उन्होंने निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल और ओवरब्रिज में दरारें आने का आरोप लगाया। चिराग सिंघल ने बताया कि ओवरब्रिज के दोनों ओर की सड़कों का कार्य अब तक शुरू नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने अप और डाउन स्ट्रीम में अवैध माइनिंग का मुद्दा उठाया, जहां नियमानुसार माइनिंग प्रतिबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवरब्रिज का कार्य जानबूझ कर रोका जा रहा है ताकि माइनिंग जारी रहे। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस अवैध माइनिंग में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है और निजी लाभ के लिए ओवरब्रिज का काम रोका जा रहा है। यदि पुल चालू हो जाता, तो माइनिंग पर रोक लग जाती। इस ओवरब्रिज की अनुमानित लागत 57 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक 54 करोड़ रुपये की पेमेंट ठेकेदार को की जा चुकी है, जबकि निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है। विजिलेंस टीम की यह तीसरी विजिट है और जांच जारी है।
वहीं इस बारे मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी जय सिंह ने बताया कि मौके से ओवरब्रिज के निर्माण संबंधी नमूने लिए गए है। जांच के बाद यदि कोई खामी सामने आती है, तो उसके अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।