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Yamuna Nagar News: यूरिया वितरण की व्यवस्था बदली, डीलरों का कोटा 20 फीसदी घटा

Sat, 13 Jun 2026 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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शहर में जाता यूरिया के कट्टों से भरा ट्रक। आर्काइव
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राजेश कुमार
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यमुनानगर। कृषि योग्य नीम कोटेड यूरिया की तस्करी और उसके औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने प्रदेश में यूरिया वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब यूरिया का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा ही डीलरों के माध्यम से बेचा जाएगा। वहीं 60 प्रतिशत यूरिया सहकारी समितियों और पैक्स केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
इससे पहले स्थिति इसके उलट थी और डीलरों की हिस्सेदारी अधिक थी। जिले में करीब 700 निजी उर्वरक डीलर और सातों खंडों में संचालित 107 पैक्स केंद्र किसानों को खाद उपलब्ध कराते हैं। विभाग के इस फैसले से जहां यूरिया की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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पिछले कुछ वर्षों से नीम कोटेड यूरिया की तस्करी कर उसे प्लाईवुड उद्योगों तक पहुंचाने के मामले लगातार सामने आ रहे थे। इसी को देखते हुए विभाग ने वितरण प्रणाली में बदलाव कर निगरानी और नियंत्रण को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से यूरिया बिक्री को जोड़ने और निगरानी बढ़ाने के बाद जिले में यूरिया की खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में जिले में 1,52,725.068 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी। वर्ष 2025-26 में यह घटकर 1,25,114.692 मीट्रिक टन रह गई। यह कमी करीब 6.136 लाख यूरिया बैग के बराबर है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 123 करोड़ रुपये बैठती है। प्रशासन ने अवैध बिक्री और दुरुपयोग के मामलों में सख्ती दिखाते हुए 14 एफआईआर दर्ज करवाई थीं। इसके अलावा 6,845 यूरिया बैग जब्त किए गए थे और 30 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस भी रद्द किए गए थे। संवाद

प्लाईवुड फैक्टरियों में यूरिया से बनता है ग्लू
खेती के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले नीम कोटेड यूरिया की तस्करी प्लाईवुड फैक्टरियों तक होती रही है। यहां इसका उपयोग प्लाई चिपकाने में इस्तेमाल होने वाला ग्लू बनाने में किया जाता है। सरकार उद्योगों के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया उपलब्ध कराती है, लेकिन इसकी कीमत प्रति बैग 3,000 रुपये से ज्यादा है। किसानों को मिलने वाला नीम कोटेड यूरिया मात्र 276.50 रुपये प्रति बैग पड़ता है। यही भारी मूल्य अंतर तस्करी को बढ़ावा देता है।
किसानों को परेशानी न हो : गुंदियाना
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना का कहना है कि कई डीलर यूरिया के साथ जिंक और सल्फर जैसे उत्पाद किसानों को जबरन बेचते हैं। कई बार निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत भी वसूल लेते हैं। जिले में पैक्स केंद्रों की संख्या और उपलब्धता भी एक चुनौती है। एक पैक्स केंद्र के अंतर्गत 10 से 15 या उससे अधिक गांव आते हैं। ऐसे में जब यूरिया की एक खेप पहुंचती है तो मांग अधिक होने के कारण किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। प्रशासन संतुलन बनाकर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराए।
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अब निजी डीलरों को 60 के बजाय 40 प्रतिशत यूरिया ही बिक्री के लिए मिलेगा। सहकारी पैक्स केंद्रों पर यूरिया ज्यादा उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले साल जिले में यूरिया की खपत में काफी कम खपत दर्ज की गई है। - डॉ. आदित्य डबास, उप निदेशक कृषि विभाग।
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