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गुरु के वास्तविक स्वरूप को समझना आवश्यक : नीलम

Tue, 30 Dec 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनने के लिए पहुची संगत। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग साध्वी नीलम भारती ने गुरु वचनों और गुरु तत्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु वचनों को समझने से पहले गुरु के वास्तविक स्वरूप और महत्व को समझना अत्यंत आवश्यक है।
साध्वी ने कहा कि गुरु परमात्मा की वह साकार मूरत है, जो जीव कल्याण के लिए समय-समय पर अवतरित होते हैं। साकार स्वरूप परमात्मा का हृदय माता के समान कोमल होता है, इसलिए उन्हें करुणा वत्सल कहा गया है। गुरु कोई साधारण मनुष्य नहीं होते, बल्कि अज्ञानता के कारण भटके हुए संपूर्ण मानव समाज को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाने के लिए स्वयं परम पिता परमात्मा मानव रूप धारण कर प्रकट होते हैं।
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गुरु ब्रह्मज्ञान के माध्यम से शिष्य को उसकी वास्तविक पहचान से परिचित कराते हैं, ताकि वह सृष्टि में अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन कर सके। गुरु के वचन केवल मुख से निकले शब्द नहीं होते, बल्कि उस महान परम सत्ता के तपोबल की अभिव्यक्ति होते हैं, जिनमें संपूर्ण सृष्टि को बदल देने की सामर्थ्य होती है। गुरु वचनों में ब्रह्मांड की ऊर्जा समाहित होती है, तभी कहा गया है कि संत वचन पलटे नहीं, पलट जाए ब्रह्मांड।
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साध्वी ने बताया कि जब गुरु के मुख से कोई वचन निकलता है तो प्रकृति भी अपनी सभी शक्तियों के साथ उसे पूर्ण करने में लग जाती है। जो शिष्य पूर्ण विश्वास, समर्पण और निष्ठा के साथ गुरु आज्ञा में चलते हुए अपने विकारों को समाप्त करता है, वही गुरु की विशेष कृपा का पात्र बनता है। गुरु के वचन ऐसे शिष्य के लिए रक्षा कवच बन जाते हैं। भजनों और सामूहिक ध्यान साधना के साथ सत्संग का समापन किया गया।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनने के लिए पहुची संगत। आयोजक

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