संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। सरस्वती नदी को गंदगी और प्रदूषित पानी से मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। इसकी कड़ी में रविवार को सरस्वती विकास बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीन ने अजात आश्रम के पास क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके पर निरीक्षण कर लंबित कार्यों को गति देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम जसपाल सिंह गिल, सिंचाई विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में विशेष रूप से सरस्वती परियोजना के अंतर्गत चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। सीईओ न कहा कि किसी भी हालत में गंदा पानी सरस्वती नदी में नहीं गिरना चाहिए। इसके लिए सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने, नियमित सफाई और जल संरक्षण के समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।
अजात आश्रम के पास नदी क्षेत्र की स्वच्छता और धार्मिक महत्व को देखते हुए महंत कृष्णा नंद सरस्वती, भीलछपर के सरपंच संजीव शास्त्री, व्यासपुर सरपंच प्रतिनिधि पंकुश खुराना और अन्य स्थानीय लोगों ने भी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सरस्वती से क्षेत्र की आस्था जुड़ी है, इसलिए नदी का संरक्षण प्राथमिकता में होना चाहिए। पंचायत अधिकारी विजयंत नेहरा ने बताया कि स्थानीय पंचायतें भी योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग के लिए तैयार हैं।
सीईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीवरेज सुधार, एसटीपी स्थापना, नदी तट की सफाई और जल प्रवाह संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर नियमित समीक्षा करने की बात कही और भरोसा दिलाया कि विभागों के समन्वय से कार्य जल्द शुरू होंगे। हालांकि स्थानीय लोगों में नाराजगी भी नजर आई। उनका कहना है कि पिछले करीब सात वर्षों में बोर्ड के कई दौरे हो चुके हैं, घोषणाएं भी हुईं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी।
लोगों का आरोप है कि क्षेत्राधिकार और प्रशासनिक पेंच के कारण योजनाएं अटक जाती हैं। ककड़ौनी गांव के सरपंच प्रतिनिधि एवं पूर्व सरपंच दीपक भारद्वाज ने बताया कि उनकी पंचायत ने एसटीपी के लिए निशुल्क जमीन दी है। पहले योजना थी कि एसटीपी में ट्रीट किए गए वेस्ट पानी को चतंग नदी से छोड़ा जाएगा, लेकिन अब इसे आगे सरस्वती में ही छोड़ने की बात कही जा रही है, जो उचित नहीं है।
प्रस्तावित योजना के तहत व्यासपुर, आंबवाला, ककड़ौनी और चंदाखेड़ी के सीवरेज पानी को ट्रीट किया जाना है। अजात आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि इस बार निरीक्षण महज औपचारिकता न रह जाए और वास्तव में कार्य शुरू हों। यदि परियोजनाएं समय पर लागू होती हैं तो इससे धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल लोगों की निगाहें आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।