जिला नागरिक अस्पताल के हादसे के बारे में जानकारी देतीं निधि व आशीमा।
यमुनानगर। देवधर गांव के पास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल चाचा-भतीजा सड़क पर ही तड़पते रहे, लेकिन आरोप है कि समय पर न तो पुलिस ने मदद की और न ही एंबुलेंस पहुंची। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की संवेदनहीनता भी सामने आई। हादसे के बाद दोनों घायल सड़क पर पड़े रहे। आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी पास खड़े रहे, लेकिन उन्होंने यह कहकर मदद से इनकार कर दिया कि उनकी ड्यूटी जोन एरिया में लगी है, इसलिए वे घायलों को अस्पताल नहीं ले जा सकते।
इसी दौरान निजी बैंक की एरिया हेड निधि अपनी सहकर्मी आशीमा के साथ मनभरवाला ब्रांच से देवधर ब्रांच जा रही थीं। उन्होंने सड़क पर दोनों को घायल अवस्था में देखा और तुरंत डायल 112 पर कॉल किया, लेकिन आरोप है कि पुलिस की ओर से कोई मदद नहीं मिली। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी कोई सहयोग नहीं किया। निधि के अनुसार, उन्होंने वहां से गुजर रहे वाहन चालकों से भी मदद मांगी, लेकिन कोई आगे नहीं आया। इस दौरान एंबुलेंस भी मौके पर नहीं पहुंची। इसी बीच प्रतापनगर से यमुनानगर आ रहे कार चालक दीपक ने मानवता दिखाते हुए अपनी कार रोकी और दोनों घायलों को अपनी गाड़ियों में डालकर मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया। निधि ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी यह भी कह रहे थे कि घायलों के बचने की संभावना कम है, जो बेहद शर्मनाक था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्राथमिकता जान बचाने की होनी चाहिए, लेकिन वहां मदद के बजाय संवेदनहीनता दिखाई दी।
अस्पताल पहुंचने पर भी हालात बेहतर नहीं थे। आरोप है कि घायलों को स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में गंभीर हालत में एक घायल को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। घायलों की पहचान 32 वर्षीय शिव कुमार और 21 वर्षीय निखिल के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार दोनों राजमिस्त्री के साथ काम करते थे और बाइक से प्रतापनगर की ओर जा रहे थे, तभी हादसे का शिकार हो गए। घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है। संवाद