जगाधरी। देश-विदेश के बाजारों में अपनी पहचान रखने वाला जगाधरी का बर्तन उद्योग इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कारोबार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। वहीं दूसरी ओर अघोषित बिजली कटौती से बर्तन उत्पादन घट गया। बिजली कटौची प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील भी धराशायी होने लगी है। औद्योगिक इकाइयां चलाने के लिए उद्यमियों को जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
उद्यमियों के अनुसार बिजली कट से सामान्य दिनों की अपेक्षा उत्पादन में 15 फीसदी की कमी आई है। जनरेटर व डीजल का इस्तेमाल होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। उत्पादन लागत पर आठ से 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। बाजार में दाम वही हैं, इससे उद्यमियों को काफी नुकसान हो रहा है। पर्याप्त बिजली न मिलने से अधिकांश इकाइयां आठ घंटे भी नहीं चल पा रही हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में दिनभर में कई बार बिजली कट लगाए जा रहे हैं। फैक्टरियां आठ घंटे भी सुचारु रूप से नहीं चल पा रहीं। मशीनें बार-बार बंद होने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और तैयार माल की सप्लाई समय पर नहीं हो पा रही। इसका असर सीधे व्यापार और मजदूरों की आय पर पड़ रहा है।
इसके अलावा खाड़ी देशों से व्यापार ठप हो गया है और कच्चे माल की कीमत में 20 से 25 फीसदी इजाफा हुआ है। अब बिजली न मिल से अधिकांश जनरेटर पर हो रहा है। इससे प्रतिदिन सैकड़ों लीटर डीजल की खपत हो रही है। जनरेटर का उपयोग करके उत्पादन लागत करीब 12 फीसदी बढ़ गई है।
दी स्मॉल स्केल एल्युमिनियम यूटेंसिल्स मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन प्रधान देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि ऑर्डर पहले ही कम मिल रहे हैं। विदेशी बाजारों में अस्थिरता और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने उद्योग को कमजोर कर दिया है। अब बिजली संकट ने लागत और बढ़ा दी है। बिजली कटों के दौरान फैक्टरी चलाने के लिए जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन डीजल के बढ़े दाम उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। इससे तैयार उत्पाद महंगे हो रहे हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है।
जेके मैटल के संचालक भारत गर्ग ने बताया कि युद्ध की विभीषिका बर्तन उद्योग के लिए घातक साबित हो रही है। उद्योगों को न बिजली मिल पा रही है और न ही डीजल से उद्योग चल पा रहे हैं। विदेशी काम 60 फीसदी खत्म हो गया है, लेकिन फैक्टरियां न चलने से देश के अन्य राज्यों में भी सप्लाई नहीं पा रही है। अधिकांश समय श्रमिक खाली बैठकर लौट जाते हैं। यदि छुट्टी करते हैं तो श्रमिकों का संकट हो जाएगा। संवाद
बर्तन की छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां
जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, यहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही हैं। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं। पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं।
बिजली निगम की तरफ से इंडस्ट्री को तय मानकों के अनुसार बिजली दी जा रही है। निगम की तरफ से कोई कट नहीं लगाया जा रहा। कई बार बिजली लाइन में फाल्ट आने की वजह से आपूर्ति बंद करनी पड़ती है। - मनिंद्र सिंह, एसई, बिजली निगम।
प्रतिष्ठानों के बाहर रखे जनरेटर। संवाद