कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, जीएसटी व अन्य वजहों से जिले के उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। उद्योगपतियों के अनुसार इस वक्त उद्योगों में उत्पादन केवल 25 प्रतिशत रह गया है। इसके चलते फैक्टरियों को आठ घंटे चलाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं रही सही कसर बिजली के अघोषित कटों ने पूरी कर दी। इसलिए बिजली जाने पर फैक्टरी चलाने के लिए जनरेटर चलाना पड़ रहा है। प्लाईवुड फैक्टरी में डीजल से जनरेटर चलाने पर प्लाईबोर्ड पर खर्च दो रुपये प्रति वर्ग फीट बढ़ गया है। यही हाल मेटल इंडस्ट्री का भी है।
बिजली निगम के अधिकारियों का दावा है कि इंडस्ट्री को रोजाना 24 घंटे बिजली दी जा रही है। दूसरी तरफ उद्यमियों का कहना है कि इसमें कट इतने ज्यादा लग रहे हैं कि मशीनरी बार-बार बंद हो रही है। जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है बल्कि वहां काम करने वाले मजदूर भी खाली बैठे रहते हैं।जब से जून माह शुरू हुआ है तब से तापमान में काफी वृद्धि हुई है। लोड बढ़ने से बिजली की खपत भी बढ़ गई है। इसी के साथ ही अघोषित कट भी लगने लगे हैं।
जिले में मेटल की छोटी-बड़ी करीब 900 फैक्टरियां हैं। वहीं करीब 400 फैक्टरियां हैं। फैक्टरी संचालकों का कहना है कि थोड़ी देर भी बिजली चली जाए तो मशीनरी बंद हो जाती है। जिन फैक्टरियों में बॉयलर चलता है वहां बिजली जाने के एक मिनट के भीतर जनरेटर चलाना पड़ता है। क्योंकि बायलर को ठंडा रखने के लिए यदि पानी नहीं चलाएंगे तो उसमें धमाका हो सकता है। बिना रुकावट के बिजली मिले इसके लिए जगाधरी क्षेत्र के फैक्टरी संचालक तो बिजली निगम के एसडीओ से भी मिल चुके हैं। इस दौरान फैक्टरी संचालकों व एसडीओ के बीच बहस भी हुई। जिस पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए फैक्टरी संचालकों ने एसडीओ की शिकायत की हुई है। एक से 15 जून तक इंडस्ट्री में एक करोड़ 77 लाख बिजली यूनिट की खपत हुई है। रोजाना की खपत करीब 12 लाख यूनिट की है।
दी जगाधरी मेटल मेन्यूफ्रेक्चर्स एंड सप्लायर एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल बतरा का कहना है कि अब तो उद्योगों में काम रहा ही नहीं है। जीएसटी, कच्चे माल के रेट बढ़ने, बाजार में डिमांड न होने से उत्पादन मात्र 20 से 25 प्रतिशत रह गया है। काम न होने से फैक्टरियां केवल एक शिफ्ट में चलानी पड़ रही हैं। बिजली चले जाने पर मजदूर खाली बैठे रहते हैं। बिजली निगम की तरफ से पहले सूचना नहीं दी जाती कि कट कब से कब तक रहेगा। यदि पहले कट का पता हो तो फैक्टरी को उसी हिसाब से चलाया जा सकता है।
मानकपुर इंडस्ट्री एरिया के प्रधान पवन सोनी का कहना है कि बिजली के कटों से बचने के लिए उन्होंने अपनी फैक्टरी में 33 हजार किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम लगाया है। लेकिन हर किसी के पास सोलर सिस्टम नहीं है। वैसे तो अब फैक्टरियों में काम 25 प्रतिशत रह गया है। सरकार को उद्योगों के बारे में विचार करना चाहिए। इस वक्त इंडस्ट्री मंदी की मार से गुजर रही है।
तारीख यूनिट लाख में
1 जून 13.29
2 जून 12.03
3 जून 13.10
4 जून 09.11
5 जून 10.21
6 जून 13.08
7 जून 12.80
8 जून 12.44
9 जून 12.49
10 जून 11.93
11 जून 08.64
12 जून 09.84
13 जून 12.87
14 जून 12.67
15 जून 13.04