स्वास्थ्य विभाग की एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन डेढ़ माह से खराब पड़ी है। मशीन के एक पार्ट के लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने दिल्ली तक की भागदौड़ कर ली, फिर भी मशीन ठीक नहीं हो सकी। इसका खामियाजा मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल समेत सभी सीएचसी, पीएचसी में उपचार के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सिविल अस्पताल में जहां मुफ्त में अल्ट्रासाउंड होता है वही निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र में उन्हें 1000 से 1200 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की मशीन कब तक ठीक होगी इसका खुद अधिकारियों को भी नहीं पता। स्वास्थ्य विभाग की अल्ट्रासाउंड मशीन मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में लगी हुई है। पहले यह मशीन ट्रॉमा सेंटर के एक कमरे में लगी थी। जिला अस्पताल का भवन अब 200 बेड का हो चुका है। इसलिए ट्रॉमा सेंटर से मशीन को नए भवन में लगा दिया गया था। यह मशीन गर्भवती महिलाओं का केवल लेवल-वन का ही अल्ट्रासाउंड कर सकती है। लेवल-वन में केवल यही पता चलता है कि महिला गर्भवती है या नहीं। 13 जुलाई को अल्ट्रासाउंड मशीन का एक पार्ट खराब हो गया था। मशीन की वार्षिक मरम्मत के लिए विभाग ने इंजीनियर से संपर्क किया पता चला कि वह जिस कंपनी के लिए काम करता था वहां से वह नौकरी छोड़ चुका है। इसके बाद जिस कंपनी की मशीन है उसी में दिल्ली संपर्क किया गया। कंपनी के इंजीनियर दिल्ली से मशीन का पार्ट तो लेकर आए, लेकिन वह मशीन में फिट नहीं हुआ। इसलिए अब मशीन ठीक करने के लिए यह वहां संपर्क किया जा रहा है।
सिविल अस्पताल में उपचार के लिए रोजाना 200 से 250 गर्भवती महिलाएं आती है। इनमें से 30 से 40 महिलाएं ऐसी हैं जिनका रोजाना लेवल वन का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अल्ट्रासाउंड के लिए न केवल जिला अस्पताल बल्कि सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी के अलावा सभी सीएचसी और पीएचसी से भी गर्भवती महिलाएं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए आती है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने के लिए प्रदीप तहलान अल्ट्रासाउंड सेंटर को अपने पैनल पर लिया हुआ है। सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को एक पर्ची देकर इस केंद्र में भेजा जाता है। इस पर्ची को दिखाकर महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड हो जाता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को एक सप्ताह की वेटिंग दी जा रही है। यानी पर्ची आज बनी है तो अल्ट्रासाउंड करने के लिए महिला को सात दिन बाद दोबारा आना होगा। इतनी गर्मी में बार-बार चक्कर काटने से बचने के लिए महिलाएं 1000 से 1200 रुपये देकर तुरंत अल्ट्रासाउंड करवा रही है। परंतु स्वास्थ्य विभाग को इसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं है।
मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केंद्र की नोडल ऑफिसर डॉक्टर संजना दुआ का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई है। इसे ठीक करने के लिए कई इंजीनियर से संपर्क किया गया है। मशीन का खराब पार्ट न मिलने के कारण दिक्कत आ रही है। उम्मीद है जल्द ही मशीन ठीक हो जाएगी।