संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में दो बुजुर्गों में तबीयत खराब हो गई। उन्हें एंबुलेंस से उपचार के लिए सीएचसी व्यासपुर में बनाए गए बेस अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार बुजुर्गों क मौत ह्रदय गति रूकने से हो सकती है। मेले से पांच दिनों के दौरान 46 लोगों को ओपीडी में चेकअप के बाद सीएचसी में ले जाया गया। जांच के दौरान पता चला कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर का कम व ज्यादा होना, शुगर व अन्य कारण थे। उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। तीन श्रद्धालुओं को उप जिला अस्पताल जगाधरी में रेफर कर दिया गया।
मेला अधिकारी (स्वास्थ्य) डॉ. वागीश गुटैन ने बताया कि दोनों बुजुर्गों की मौत प्राकृतिक है। एक से छह नवंबर की सुबह तक कपालमोचन मेला में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने छह मेडिकल पोस्ट विभिन्न सेक्टरों में बनाई गई है। प्रत्येक पोस्ट पर एक डॉक्टर, एक औषधि कारक, एक प्रयोगशाला तकनीशियन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। सभी पोस्ट पर 8720 श्रद्धालुओं का ओपीडी में चेकअप करने के बाद दवाए दी गईं। ज्यादातर श्रद्धालुओं में बीपी, शुगर, खांसी, बुखार, दर्द एवं पेट खराब होने की शिकायत रही।
पानी के 848 सैंपल ओटी टेस्ट में मिले फिट
सिविल सर्जन यमुनानगर डाॅ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मेले में प्रतिदिन डॉक्टरों की ओर से खाने-पीने के सामान का औचक निरीक्षण किया और भंडारों के खाने की भी प्रतिदिन चेकिंग की गई। स्वास्थ्य विभाग ने पानी के 52 बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के लिए सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट अभी लंबित है। पानी के 848 ओटी टेस्ट के सैंपल लिए गए. जो जांच में सही पाए गए।
मेले में अलग-अलग स्थानों पर 10 एंबुलेंस की ड्यूटी भी लगाई गई। इसके अतिरिक्त मेले में स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें फिश टैंक रखा गया है, जिसमें मच्छर के लार्वा खाने वाली गंबूजिया को रखा गया। मेला क्षेत्र में समय समय पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने फॉगिंग की।