यमुनानगर। शहर के ढाई साल के बच्चे व उसकी डेढ़ साल की बहन में मंकीपॉक्स के लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई थी। परंतु दोनों बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त नहीं मिले। स्वास्थ्य विभाग ने ढाई साल के बच्चे का सैंपल जांच के लिए दिल्ली लैब में भेजा था। रविवार को बच्चे की रिपोर्ट निगेटिव आई। रिपोर्ट निगेटिव आने से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली। फिलहाल दोनों बच्चों को सिविल अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
जिला निगरानी अधिकारी डॉ. वागीश गुटैन ने बताया कि डेढ़ व ढाई साल के भाई-बहन में मंकीपॉक्स के लक्षण थे। एहतियात के तौर पर दोनों बच्चों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। ढाई साल के बच्चे के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे गए थे। वहां से उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। उपचार के बाद जल्द ही उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी।
आईएमए के डॉक्टरों से हुई ऑनलाइन मीटिंग
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि दूसरे देशों में मंकीपॉक्स के केस अधिक आ रहे हैं। इसलिए दूसरे देशों से आए लोगों पर नजर रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति पिछले 21 दिनों में विदेश की यात्रा करके, खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका से और उसमें लक्षण पाए जाते हैं तो उसे स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवानी होगी। चिकित्सकों के अनुसार मंकीपॉक्स संक्रमण एक वायरस से होता है। सिविल सर्जन ने वीडियो कॉंफ्रेंसिंग द्वारा जिले के सभी सरकारी डॉक्टर व आईएमए और आईएपी के डॉक्टर के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि जिले में अभी इस बीमारी का कोई केस नहीं आया है। मंकीपॉक्स होने पर रोगी को बुखार आना, त्वचा पर चटके (चेहरे से शुरू होकर, हाथ, पैर, हथेलियों और तलवों तक), शरीर पर सूजे हुए दाने पड़ना, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द या चकावट, गले में खराश और खांसी इसके लक्षण हैं।
अस्पताल में बनाया गया है आइसोलेशन वार्ड: डॉ. वागीश
डॉ. वागीश गुटैन ने बताया गया कि मंकीपॉक्स के कारण रोगी की आंखों में दर्द या धुंधली दृष्टि, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बार-बार बेहोश होना और दौरे पड़ना, पेशाब में कमी परेशानियां आती हैं। यदि कोई मंकीपॉक्स का केस मिलता है तो उसके लिए मुकंद लाल सिविल नागरिक अस्पताल यमुनानगर में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति मिलता है तो उसको आइसोलेट करें। अन्य व्यक्तियों से दूरी बनाके रखें। नाक व मुंह को मास्क से ढकना चाहिए और घावों को चादर से ढक कर रखें। जांच की पुष्टि के लिए तुरंत स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें।