संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लंबित मांगों को लेकर एनएचएम कर्मचारी शनिवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। भले ही सरकारी डॉक्टर दो दिन की हड़ताल को खत्म करके काम पर लौट आए लेकिन कार्यालयों में करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। प्रशासनिक कार्य अटक गए हैं।
यहां तक की शनिवार को आधे से ज्यादा एंबुलेंस भी हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (एचकेआरएनएल) के माध्यम से रखे गए ड्राइवरों से चलवानी पड़ी। यदि एंबुलेंस गई भी तो ज्यादातर में ईएमटी यानि इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन नहीं थे, क्योंकि यह सब एनएचएम के तहत ही हुए हैं। बिना ईएमटी के एंबुलेंस में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ईएमटी ही एंबुलेंस से ले जाए जा रहे मरीज के स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखता है।
जिले में कुल 22 एंबुलेंस हैं। इनमें से चार-पांच एंबुलेंस तो हर वक्त मरम्मत कार्य के चलते गैराज में ही रहती हैं। बाकी बची एंबुलेंस को चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 39 ड्राइवर हैं। साथ ही 27 ईएमटी भी हैं। वहीं एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण पूरी तरह से प्रभावित रहा। गर्भवतियों व बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए टीके नहीं लगाए जा सके।
इसके अलावा डिलीवरी वार्ड, इमरजेंसी, नीकू वार्ड, ट्रामा सेंटर में भी स्टाफ की कमी देखी गई। एएनएम आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर गर्भवतियों व बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए वेक्सीन लगाती हैं, लेकिन दो दिन से यह काम रूका हुआ है। टीकाकरण के लिए लोग आंगनबाड़ी केंद्रों पर चक्कर काट रही हैं। वहीं रेगुलर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। एनएचएम कर्मचारियों ने शनिवार को दूसरे दिन भी सिविल सर्जन कार्यालय के सामने सुबह से शाम तक धरना दिया। एनएचएम कर्मचारी साझा मोर्चा हरियाणा के जिला प्रधान अमित गुर्जर ने कहा कि सरकार हड़ताल को खत्म करना ही नहीं चाहती। ऐसा लग रहा है कि सरकार खुद चाहती है कि कर्मचारी हड़ताल पर रहें। एसीएस ने कहा है कि यह एनएचएम कर्मचारी नहीं बल्कि दिहाड़ीदार मजदूर हैं। वह दिहाड़ी पर किसी और को भी रख लेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2021 ने कोरोना महामारी के दौरान घोषणा की थी कि उन्हें सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाएगा। तीन साल बाद भी कोई घोषणा पूरी नहीं हुई। फिलहाल चार दिन की हड़ताल की गई है। यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। सरकार ने ही पहले मांगे मानने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।