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आयुष्मान भारत योजना के तहत डेंगू-मलेरिया का भी करवा सकते हैं निशुल्क इलाज

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ट्रॉमा सेंटर में बनाए गए आयुष्मान योजना केंद्र पर कार्ड बनवाते हुए - फोटो : YAMUNA NAGAR
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आयुष्मान योजना के तहत पैनल में आने वाले प्राइवेट अस्पताल में मरीज डेंगू व मलेरिया का फ्री इलाज करा सकता है। लेकिन यहां वे ही केस जैस हेमरेजिक डेंगू फीवर तथा खतरनाक मलेरिया रोग का ही इलाज संभव है। जबकि सामान्य मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टायफाइड का इलाज सरकारी अस्पताल में ही कराना होगा। ऐसे में मरीज का अन्य जगहों पर भटकने की जरूरत नहीं है। अस्पताल में इलाज के अनुसार सारी सुविधाएं दी गई। यहां तक वहां के सीनियर डॉक्टर से भी मरीज सलाह मशवरा कर सकता है।
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नाम में गलत होने पर यह करें : हालांकि, कुछ जानकारियों के अभाव में लोग लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ओर से योजना की जानकारी भरा पत्र हर घर में पहुंचाया जा रहा है, लेकिन इसमें भी कुछ त्रुटियां मिली हैं। लेकिन इसके लिए टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। पात्र त्रुटि को ठीक करवाने के लिए एक एफीडेविट बनवाकर नाम को दोबारा से अपडेट करवा सकता है ताकि उसे योजना का लाभ मिल सके। इतना ही नहीं कोई व्यक्ति इस योजना में खुद के शामिल होने की जानकारी हेल्पलाइन नंबर 14555 से हासिल कर सकता है। वह योजना की वेबसाइट मेरा डॉट पीएमजेएवाई डॉट जीओवी डॉट इन पर लॉन इन कर भी यह जानकारी हासिल कर सकता है।
रोजाना बन रहे 100 कार्ड : आयुष्मान योजना विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विजय दहिया ने बताया कि जब योजना शुरू हुई थी उस दौरान कार्ड बनवाने वालों की काफी संख्या रही। उस वक्त एक दिन में 300 कार्ड बनाए गए, लेकिन अब योजना के बारे में तकरीबन सभी पता चल चुका है। ऐसे में अब रोजाना 100 कार्ड रोजाना बन रहे हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि कई लोग ऐसे हैं जो योजना के नाम अफवाह फैला रहे हैं। ऐसे में बहकावे में न आए और जानकारी लेने के लिए सिविल अस्पताल में बने आयुष्मान योजना विभाग में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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क्या है हेमरेजिक डेंगू फीवर-कॉम्प्लिकेटेड मलेरिया : हेमरेजिक डेंगू फीवर खतरनाक है। इसमें प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कणिकाएं की संख्या कम होने लगती हैं। नाक और मसूड़ों से खून आने लगता है। शौच या उल्टी में खून आता है। स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे-बड़े चकत्ते पड़ जाते हैं। मलेरिया के साथ डेंगू होना बहुत खतरनाक होता है। हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगती हैं। आयुष्मान योजना के तहत जिले से 5019 पात्र इसका लाभ पा चुके हैं। जिनमें प्राइवेट अस्पतालों से 3682, सिविल अस्पताल यमुनानगर से 660, जगाधरी अस्पताल से 531 तथा सीएचसी से 154 ने अभी तक लाभ पाया है। अभी तक एक लाख 30 हजार कुल कार्ड बने हैं।
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