संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने श्रद्धालुओं को गुरु सेवा का महत्व विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि निराकार परमात्मा संपूर्ण मानव जाति के उद्धार के लिए साकार रूप में धरा पर अवतरित होता है, किंतु माया का आवरण मनुष्य को उसकी उपस्थिति के महत्व को समझने नहीं देता।
उन्होंने कहा कि वही परम सत्ता एक स्थान से अपनी लीला समेटकर दूसरे स्थान पर प्रकट होती है तो लोग उनके पदचिह्नों की पूजा करते हैं और युगों-युगों तक उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। पूर्व जन्म के पुण्य संस्कारों और गुरु कृपा से ही कुछ सौभाग्यशाली आत्माओं को वर्तमान में उनकी दिव्य उपस्थिति का बोध हो पाता है।
स्वामी ने स्पष्ट किया कि गुरु अपने भक्त को कभी निजी सेवा में नहीं लगाते, बल्कि समाज कल्याण, धर्म और सत्य के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित करते हैं। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जन-जन को आत्मिक रूप से जाग्रत करना ही गुरु का मुख्य ध्येय होता है। उन्होंने कहा कि जो शिष्य गुरु आज्ञा में चलते हुए मन, वचन और कर्म से स्वयं को परोपकार के लिए समर्पित करता है, वही सच्ची गुरु सेवा का अर्थ समझ पाता है।
उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं के लिए भी गुरु सेवा दुर्लभ मानी गई है, किंतु मानव समाज में से केवल कुछ ही लोग इस अवसर का लाभ उठा पाते हैं। ऐसे व्यक्ति परम सौभाग्यशाली होते हैं जिन्हें गुरु शिष्य बनाकर विश्व शांति के लक्ष्य में सहभागी बनाते हैं। जब शिष्य सच्चे सेवादार के रूप में सेवा क्षेत्र में उतरता है तो गुरु उसे वह दिव्य संपदा प्रदान करते हैं जो उसकी कल्पना से भी परे होती है।
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थ गुरु कृपा से सुलभ हो सकते हैं। गुरु अपने तपोबल से शिष्य को वह आत्मिक अवस्था प्रदान करते हैं जो ऋषि-मुनियों को भी कई जन्मों की तपस्या के बाद प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि यह मानव जीवन सीमित समय के लिए मिला अवसर है। यदि समय रहते गुरु सेवा का महत्व समझ लिया जाए तो इस लोक और परलोक दोनों का कल्याण संभव है।