आधार कार्ड बनवाना लोगों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। घंटों लाइन में
लगने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आवेदनकर्ता का नंबर
फिंगरप्रिंट और फोटो के लिए आ जाए।
कई लोग तो ऐसे हैं जिन्हें
फिंगरप्रिंट और फोटो के लिए टोकन भी मिल गया और इतना उनका नंबर आया तो
कर्मचारियों की छुट्टी का समय हो गया। यह मारामारी सिर्फ लघु सचिवालय में
बने आधार कार्ड सेंटर की नहीं, बल्कि शहर में अन्य जगह पर बने सेंटर की भी
है।
लोग आधार कार्ड बनवाने के लिए रोज केंद्रों पर चक्कर लगा रहे
हैं। लेकिन उन्हें कहीं आधार बनता नहीं दिख रहा है। कुछ लोग जहां आधार
कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगा रहे है, तो कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें आवेदन
किए हुए कई माह हो गए हैं लेकिन उनका कार्ड अभी तक बनकर हाथ में नहीं आ
पाया।
लघु सचिवालय में बने सेंटर पर कई लोग ऐसे मिले जोकि आधार
कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए एक-एक सप्ताह से चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन
उन्हें अभी तक टोकन नंबर भी नहीं मिल पाया है। टोकन नंबर नहीं मिलने से
उन्हें चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
इनमें कई ऐसे लोग
हैं, जिनके गांव की दूसरी सचिवालय से 15 से 18 किलोमीटर है। लोगों का कहना
है कि प्रशासन की ओर से आधार कार्ड बनवाने के लिए वार्ड व कॉलोनी में कैंप
लगवाना चाहिए। क्योंकि अभी बहुत से लोग कार्ड बनवाने से वंचित हैं। अभी
जिले में साढ़े 12 लाख लोगों में से 9.5 लाख को एनरौलमेंट नंबर मिल पाया
है। आधार कार्ड बना रही कंपनी रेडियन इंफो सिस्टम के जिला मैनेजर चंदन सिंह
का कहना है कि यहां पर जल्द ही मशीनों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई
जाएगी।