संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल की दीवारों से टाइलें उखाड़ने के बाद अब उन्हें पेंट करने की तैयारी है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्वास्थ्य विभाग से करीब 87 लाख रुपये का बजट मांगा है। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से टाइलों की जगह बाहरी दीवारों पर पेंट कराने को बेहतर विकल्प बताया जा रहा है।
करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से 200 बेड का पांच मंजिला जिला नागरिक अस्पताल भवन तैयार किया गया था। भवन तैयार होने के बाद दीवारों पर लगी टाइलें लगातार गिरने लगीं। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को देखते हुए यह मामला गंभीर हो गया था। टाइलें गिरने के कारण कई स्थानों पर दीवारें बदसूरत दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच करवाई और कमजोर टाइलों को दीवारों से उतार दिया। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार अस्पताल भवन की डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) मई माह में समाप्त हो चुकी है। डीएलपी के दौरान निर्माण संबंधी कमियों को ठीक कराने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है। अब डीएलपी मई में खत्म होने के कारण भवन की मरम्मत और रखरखाव के लिए विभाग को अलग से बजट उपलब्ध कराना होगा।
अधिकारियों का कहना है कि दीवारों पर दोबारा टाइलें लगाना उचित समाधान नहीं होगा। लगातार टाइलें गिरने की समस्या को देखते हुए अब बाहरी दीवारों पर पेंट कराया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए करीब 87 लाख रुपये की राशि का अनुमान लगाया गया है। पीडब्ल्यूडी ने स्वास्थ्य विभाग से यह बजट उपलब्ध कराने के लिए मांग भेजी है।
टाइलें हटाए जाने के बाद अस्पताल की बाहरी दीवारें काफी बदसूरत दिखाई दे रही हैं। जगह-जगह दीवारों पर टाइलों के अवशेष और सीमेंट दिखाई दे रहा है। ऐसे में अस्पताल की सूरत सुधारने के लिए पेंट कराने की योजना बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब यह सवाल भी है कि जिस भवन पर पहले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, उसकी दीवारों की खराब टाइलों को हटाने के बाद दोबारा बेहतर रूप देने के लिए इतनी बड़ी राशि अतिरिक्त रूप से खर्च करनी पड़ेगी।
एक साल से गिर रही टाइलें तो अब पैसे क्यों
एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि जिला नागरिक अस्पताल की दीवारों से टाइलें एक साल से गिर रही हैं। जब टाइलें गिरने लगी थी तो यह डीएलपी में थी। सारी टाइलों की जांच करवा कर इन्हें दोबारा लगाने की जिम्मेदारी भवन निर्माण करने वाली एजेंसी की थी। इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने जानबूझ कर इसमें देरी की ताकि डीएलपी समय निकल जाए और एजेंसी को फायदा हो।
अस्पताल की बाहरी दीवारों से जो टाइलें गिरने वाली थी उन्हें पीडब्ल्यूडी ने उतरवा दिया है। अब करीब 87 लाख रुपये का बजट मांगा जा रहा है ताकि बाहर पेंट करवाया जा सके। विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा है। - डॉ. पुनीत कालड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन।