साढौरा। घाड़ क्षेत्र की मुस्लिम बहुल पंचायत कल्याणपुर में शामिल तीन जुड़वा गांवों कल्याणपुर, अंटारी व बना बहादुरपुर के 300 घरों की आबादी महज दो हजार है। इस पंचायत से लगभग प्रत्येक परिवार का एक या एक से अधिक सदस्य भारतीय सुरक्षा बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं या दे चुके हैं। तीन वीर देश के लिए प्राण न्योछावर कर चुके हैं। वर्तमान में भी लगभग सौ युवा सुरक्षा बलों में कार्यरत हैं। इनमें से भी तीन खुर्शीद, शराफत व जमील जम्मू-कश्मीर में तैनात।
गढ़ी विरान के 45 वर्षीय खुर्शीद इन दिनों भारतीय सेना में कार्यरत होकर इन दिनों जम्मू-कश्मीर में तैनाक हैं। पत्नी खुर्शीदा ने बताया कि उनके पति तीन साल से श्रीनगर में तैनात हैं। ईद का त्योहार मनाने के बाद खुर्शीद 26 अप्रैल को वापस ड्यूटी पर गए थे। शुक्रवार सुबह ही उनसे बात हुई थी। तब उन्होंने खुद के सकुशल होने की बात कहते हुए परिवार की खैरियत पूछी थी। खुर्शीदा अपने दोनों बेटों अमीर खान व समीर खान के साथ मिलकर दुआएं कर रही है।
बनाबहादुरपुर के 45 वर्षीय जमील भी इन दिनों सीआरपीएफ के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। ईद के अवसर पर छुट्टी पर आए जमील 22 अप्रैल को ही ड्यूटी पर वापस चले गए थे। उसके बाद से ही बदले हालात में उसके मां-बाप वलीदीन व सलामती उसके लिए चिंतित हैं। जमील ने दो दिन पहले ही पत्नी जुलिया से बात की थी।
बनाबहादुरपुर के ही 30 वर्षीय शराफत भी इन दिनों जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। सीआरपीएफ में कार्यरत शराफत भी ईद की खुशियां मनाने के बाद 20 अप्रैल को वापस ड्यूटी पर गए थे। उनके बड़े भाई इसरान ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही उनकी शराफत से बात हुई थी। इस चंद मिनटों की बातचीत में शराफत ने सीमा पर हालात नाजुक होने की बात कहते हुए परिवार को उसकी चिंता न करने की बात कही।
कल्याणपुर अंटारी पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि व पूर्व सैनिक जुल्फान अली ने बताया कि उनकी पंचायत के तीन लाल देश के लिए बालिदान हो चुके हैं। दीन मोहम्मद पुत्र मौल दीन 1987 में श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों का मुकाबला करते हुए बलिदान दिया था। सीआरपीएफ जवान जैमल खान 31 मार्च 2021 को नक्सल प्रभावित असम में हुई गोलीबारी से बलिदान हो गए थे। सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर कार्यरत 42 वर्षीय नूर हुसैन सितंबर 2022 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से बलिदान हुए थे। संवाद