यमुनानगर। अटल भूजल योजना के अंतर्गत हरियाणा के 14 जिलों के 36 ब्लॉकों की 1647 पंचायतों में से 479 पंचायतों का आकलन किया गया। ग्राउंड वाटर सेल की ओर से जारी टॉप फाइव रिपोर्ट में यमुनानगर के जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लॉक पहले तीन स्थान हैं। इसके बाद फिर गुरुग्राम का फारुक नगर और महेंद्रगढ़ का नारनौल ब्लॉक हैं।
आंकड़ों के मुताबिक यमुनानगर के ब्लॉक जगाधरी में 14.25 मीटर, सरस्वती में 15.02 मीटर और साढौरा में 17.71 मीटर है। यहां पिछले साल की तुलना में अब भूजल स्तर में काफी सुधार आया है। अन्य पंचायतें इससे पिछड़ गई जिसमें सुधार की काफी गुंजाइश है। अटल भूजल योजना के अंतर्गत सात राज्य गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश आते हैं।
इनमें हरियाणा के महेंद्रगढ़, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पलवल, गुरुग्राम, भिवानी, कैथल, सिरसा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, चरखी दादरी, करनाल, रेवाड़ी तथा पानीपत जिले अटल भूजल योजना में शामिल हैं।
गिरते भू-जलस्तर का सबसे बड़ा कारण धान की खेती का बढ़ता रकबा है। प्रदेश में 1966-67 में धान की खेती 4.8 लाख एकड़ में होती थी, जो अब बढ़कर 35 लाख एकड़ तक पहुंच गई है। अनुमानत: एक हेक्टेयर में धान की खेती करने पर खर्च करीब 15 लाख लीटर पानी होता है। इससे भूजल संकट पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार गिर रहे भूजल जल का मुख्य कारण धान (जीरी) व गन्ना की फसल की सिंचाई के लिए पानी की खपत अधिक होना है। आंकड़ों के मुताबिक एक एकड़ धान की फसल में 1100 मिली मीटर तथा गन्ने की फसल में 2100 मिली मीटर सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि किसान धान में डीसीआर विधि का उपयोग करें तो सिंचाई के दौरान पानी की खपत कम होगी। संवाद