संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की सफाई पर निगम अफसर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, पर फिर भी गंदगी का मुद्दा लोगों की जुबान पर है। बीते वित्त वर्ष भी सफाई के कामों में 20.84 करोड़ रुपये खप गए। अब वित्त वर्ष 2025-26 में सफाई के कामों पर 33.4 करोड़ खर्चे का बजट है। इस बजट में कचरा उठान से निस्तारण का 20 करोड़ खर्च करने का प्रावधान है।
पीपीपी के मुताबिक नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र की कुल आबादी पांच लाख 37 हजार 183 है। निगम क्षेत्र से रोज 250 से 300 टन कचरा निकलता है। आबादी मुताबिक तीन हजार सफाई कर्मचारी होने चाहिए, पर करीब 750 सफाई कर्मी ही हैं। यही मुद्दा नगर निगम की सदन बैठकों में कई बार आ चुका है, बावजूद इसके सफाई कर्मियों की कमी पूरी नहीं हो पाई। साथ ही नगर निगम के पास सफाई कार्यों के लिए खुद के पर्याप्त वाहन भी नहीं हैं, जिन्हें किराये पर लेने पर हर साल एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है।
इसी तरह वित्त वर्ष 2024-25 में किराये पर वाहन लेने व उनके रखरखाव पर करीब 70.64 लाख रुपये खर्चे गए, वहीं इस पर वित्त वर्ष 2025-26 में भी 1.50 करोड़ रुपये खर्च का बजट है। सफाई कर्मियों व संसाधनों की कमी का असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ता है।
हालांकि उठान से निस्तारण व मुख्य मार्गों व बाजारों में सफाई व कचरा उठान का काम ठेके पर दिया जाता है, पर गलियों-सड़कों व नाले-नालियों की सफाई व कचरा उठान का काम नगर निगम के पास रहता है, जो कम स्टाफ व संसाधनों में प्रभावित होता है। इससे शहर की स्वच्छ रैंकिंग भी बिगड़ती है। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में भी सफाई कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की स्वच्छ रैंकिंग 170 से नीचे गिरकर 221 पर आ गई थी।