यमुनानगर। शहर की करीब 30 साल पुरानी ट्रंक सीवर लाइनों को अब अत्याधुनिक सीआईपीपी (क्योर्ड-इन-प्लेस पाइप) तकनीक से दुरुस्त किया जाएगा। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग इस कार्य पर करीब 69 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। जिले में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। परियोजना का करीब 15 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और एजेंसियों को अगले वर्ष अक्तूबर तक पूरा काम खत्म करने का लक्ष्य दिया गया है।
शहर में कुल सीवरेज नेटवर्क की लंबाई लगभग 540 किलोमीटर है। इनमें से 13 किलोमीटर हिस्सा ट्रंक सीवर लाइन का है। ये मुख्य सीवर लाइनें इतनी बड़ी हैं कि इनमें एक व्यक्ति आसानी से चल सकता है। शहर का अधिकांश सीवरेज पानी इन्हीं लाइनों के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचता है। विभाग के अनुसार ट्रंक सीवर लाइनें शहर में वर्ष 1997 से 1999 के बीच बिछाई गई थीं।
तीन दशक पुरानी हो चुकी इन लाइनों की आंतरिक सतह कई स्थानों पर खुरदरी और क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके कारण सीवरेज के प्रवाह पर असर पड़ रहा है और कई क्षेत्रों में जाम की समस्या पैदा होती है। अब सीआईपीपी तकनीक के जरिए इन लाइनों को भीतर से नया रूप दिया जाएगा, जिससे पानी का प्रवाह सुचारु रहेगा।
शहर में ट्रंक सीवर लाइन जम्मू कॉलोनी स्थित एसटीपी से विश्वकर्मा चौक, कमानी चौक, कन्हैया साहिब चौक, जिला नागरिक अस्पताल, मधु चौक, तिकोना पार्क बस स्टैंड, भगत सिंह चौक, पुराना रादौर रोड और कैनाल रेस्ट हाउस रोड सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरती है। इन लाइनों के बेहतर होने से शहर के बड़े हिस्से की सीवरेज व्यवस्था मजबूत होगी। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने परियोजना के लिए दो एजेंसियों को ठेका दिया है।
पुरानी लाइनों को पूरी तरह बदलने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीक से पुनर्जीवित करना अधिक किफायती और सुरक्षित विकल्प है। यदि इन लाइनों को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर खोदाई की जाती तो न केवल करोड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च होते, बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात भी लंबे समय तक प्रभावित रहता। ऐसे में बड़े स्तर पर खोदाई करने से आसपास की संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है। संवाद
सीआईपीपी तकनीक इस तरह से करती है काम
सीआईपीपी (क्योर्ड-इन-प्लेस पाइप) सीवर और भूमिगत पाइप लाइनों की मरम्मत की आधुनिक तकनीक है, जिसका उपयोग दुनिया के कई देशों में किया जा रहा है। इस तकनीक में पुरानी पाइप लाइन को बाहर निकालने या बड़े पैमाने पर खोदाई करने की जरूरत नहीं पड़ती। विशेष प्रकार के रेजिन से तैयार लचीले लाइनर को पुरानी पाइप के भीतर डाला जाता है। इसके बाद गर्म पानी, भाप या हवा के दबाव की सहायता से इसे पाइप की भीतरी सतह से चिपकाया जाता है। रेजिन के सख्त होने के बाद पुरानी पाइप के अंदर ही एक नई मजबूत परत तैयार हो जाती है। इससे पाइप की क्षमता और मजबूती बढ़ जाती है तथा रिसाव और टूट-फूट की समस्या दूर हो जाती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम खोदाई में तेजी से काम पूरा हो जाता है और यातायात व आमजन को कम परेशानी होती है।
सीआईपीपी तकनीक से ट्रंक सीवर लाइनों की मरम्मत कराई जा रही है। इस तकनीक से सीवरेज की लाइन की मरम्मत तो हो जाती है, साथ ही लाइफ भी बढ़ जाती है। इसमें सड़कों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती है। - दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
सीआईपीपी तकनीक से सीवरेज लाइन की मरम्मत करते कर्मचारी। विभाग