यमुनानगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दीनबंधु छोटू राम थर्मल प्लांट में स्थापित होने वाली जिस नई 800 मेगावाट यूनिट का शिलान्यास किया है, उसे वर्ष 2023 में पिटहेड (झारखंड) में लगाया जाना था। तब हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल ने प्लांट को रुकवाने के लिए मजबूती से केंद्र सरकार के समक्ष मजबूत पैरवी की थी।
उन्होंने बिजली कंपनियों के साथ बातचीत कर इस प्लांट के यमुनानगर में स्थापित करने पर इससे होने फायदे गिनवाकर प्रोजेक्ट को रुकवा दिया था। इतना ही नहीं तब हरियाणा की तरफ से पीएम मोदी के सामने यमुनानगर में प्लांट लगने पर सालाना 180 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होने का अनुमान और परियोजना के पूरे जीवनकाल में 4500 करोड़ रुपये की सरकार को बचत होने का तर्क दिया गया था।
इसके बाद यमुनानगर के थर्मल के अंदर ही नई यूनिट को लगाने के लिए मुहर लगी थी। नई 800 मेगावाट यूनिट को लगाने के लिए बाद में यमुनानगर को इसलिए चूना गया था, चूंकि मौजूदा समय में दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट के अंदर 409.242 हेक्टेयर (1011.26 एकड़) भूमि है इसी में नई 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट लगाने के लिए काफी है। दूसरा, पानी की उपलब्धता अन्य जगहों से अधिक है।
राख को स्टोर करने के लिए जिले के साथ लगते लापरा गांव में दो बड़े तालाब बनाए गए, जिनकी क्षमता 43.62 लाख मीट्रिक टन होगी, वर्तमान में 5.91 लाख मीट्रिक टन के तालाब हैं जिनकी क्षमता 25.16 लाख मीट्रिक टन है। ऐसे में संयंत्र स्थापित करने में काफी बचत होगी। इसके बाद
फरवरी 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एचपीजीसीएल (हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड) के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस प्लांट का कार्य शुरू करने के लिए टेंडर जारी किया था, जोकि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) को इसका टेंडर मिला हुआ है। तब इस यूनिट की 6900 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि थी। संवाद
पर्यावरण क्लीयरेंस में देरी से बढ़ी लागत
वर्ष 2024 में बीएचईएल को नई 800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्लांट के निर्माण के लिए 6900 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ था। प्लांट के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस मिलने में देरी होने से इसका काम लेट होता चला गया। ऐसे में प्लांट के निर्माण के लिए उपयोग होने वाली सामग्री के दरें भी बढ़ गई। बाद में क्लीयरेंस मिल गई। इसके बाद बीएचईएल ने देरी के चलते सामग्री की दरें बढ़ जाने से पूरे प्लांट के बजट को दोबारा रिवाइज करने की बात कही थी। बाद में इसकी राशि 7272 करोड़ रुपये फाइनल हुई।
प्लांट के बारे में यह खास
थर्मल पावर प्लांट एचपीजीसीएल कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में से एक है। रिलायंस एनर्जी लिमिटेड और शंघाई इलेक्ट्रिक ने संयुक्त रूप से बनाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मार्च-1993 में फरीदाबाद से रिमोट कंट्रोल के माध्यम से इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा ने परियोजना को मंजूरी दी। 2005-2008 में इसे विकसित किया गया। इससे पहले वर्ष-2004 में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास किया था, लेकिन इस दौरान परियोजना कागजों में रही थी।