संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। टीबी मरीजों के लिए दवा खरीद घोटाले में लगे आरोपों की जांच करने के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्यों की आपस में ही ठन गई है। रिपोर्ट तैयार करने को लेकर जांच कमेटी सदस्य एकमत नहीं है। जांच कमेटी की सदस्य डॉ. सुशीला सैनी ने घोटाले की फाइनल एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) पर अपने हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। सिविल सर्जन ने डॉ. सुशीला सैनी से कई कार्यों के चार्ज वापस लेकर अन्य डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला को दे दिए।
शांति कॉलोनी निवासी बलविंद्र सिंह ने उनके खिलाफ सीएम विंडो के अलावा विजिलेंस को शिकायत देते हुए दवा खरीद में 18 लाख 50 हजार रुपये का घोटाला करने के आरोप लगाए थे। आरोप है कि टीबी मरीजों के लिए सरकारी दवाइयां होने के बावजूद बिना अनुमति बाहर से करीब 18.50 लाख रुपये की दवाइयां खरीदी गईं। अगले दिन वेयरहाउस की ओर से भी टीबी की दवाइयां जिले में भेज दी गई।
इसमें घोटाला करते हुए सरकारी रिकॉर्ड में सारी दवाइयों की खपत दिखा दी गई। वहीं जिले में इतने टीबी के मरीज नहीं हैं, जितनी दवाइयों की खपत दिखाई गई। बलविंद्र सिंह ने इसका आरोप सिविल सर्जन मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप गोयल पर लगाया है। मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला, डॉ. सुशीला सैनी व डॉ. संजय राठी की टीम का गठन किया था।
जब कमेटी का गठन हुआ तो डॉ. सुशीला सैनी सप्ताहभर की छुट्टी पर चली गई। वीरवार को ही उन्होंने ड्यूटी पर ज्वाइन की। जैसे ही वह कुर्सी पर बैठी तो उनके सामने टेबल पर दवा घोटाले की जांच रिपोर्ट की फाइल रख दी गई। कर्मचारी ने फाइल पर डॉ. सुशीला से साइन करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना करते हुए फाइल को वापस भेज दिया। एक बार फिर से फाइन उनके पास भेजी गई, उन्होंने मना कर दिया।
उन्होंने कमेटी को तर्क दिया कि जांच के दौरान वह छुट्टी पर थी। उन्हें पता ही नहीं है कि जांच में क्या हुआ तो वह अपने हस्ताक्षर क्यों करे। जब ज्यादा दबाव डाला गया तो डॉ. सुशीला ने एटीआर पर लिखा कि वह सिविल सर्जन के कहने से एटीआर पर साइन कर रही हैं। यह लिखते ही जांच कमेटी से लेकर सिविल सर्जन कार्यालय तक में हलचल बढ़ गई। थोड़ी देर बाद ही सिविल सर्जन कार्यालय से आदेश जारी हुए कि डॉ. सुशीला सैनी से मेडिकल, स्टोर, स्थापना शाखा और सेक्सुअल हरासमेंट के चार्ज वापस लिए जाते हैं। डॉ. सुशीला सैनी से चार्ज लेकर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला को सौंप दिए गए। दवा घोटाले की जांच विजिलेंस की ओर से भी की जा रही है।
डिप्टी सिविल सर्जन (मलेरिया) डॉ. सुशीला सैनी के पास कई कार्यों का चार्ज था। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला उनसे सीनियर हैं। इस पर डॉ. सुशीला से चार्ज लेकर डाॅ. मंगला को दिए गए हैं। इसका मामले की जांच से कोई लेना देना नहीं है। जांच के लिए कमेटी बनी है। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।