जगाधरी। राजकीय स्कूल में मील बनाने के लिए राशन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अध्यापक व मील वर्कर्स अपने स्तर पर इसकी व्यवस्था करने में जुटे हैं, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। सरकार की ओर से मील बनाने को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत स्कूलों को हर हित स्टोर से ही मील के लिए राशन खरीदना होगा। जिसका प्रभारी, मील वर्कर्स व अध्यापक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर हित स्टोर पर सभी सामान नहीं मिल पाता है। वहीं अब बजट न होने के कारण स्टोर संचालकों ने सामान देना बंद कर दिया है। ऐसे में स्कूलों में विद्यार्थियों को निवाले के लाले पड़े गए हैं।
इसके लिए स्कूल प्रभारियों ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के मार्फत निदेशालय को बजट जारी करने के लिए कई पत्र लिखे हैं, लेकिन तीन महीने से इसका समाधान नहीं हो पाया है। सरकार की ओर से जुलाई में अंतिम बजट जारी किया गया था। इसके बाद से मील के राशन व कुकिंग कोस्ट के पैसे नहीं जारी किए गए हैं। बता दें कि जिले में पांचवीं तक के करीब 48000 और छठी से आठवीं तक के 22000 विद्यार्थियों को मील दिया जाता है।
गुलगुले व पोहा की जगह मिल रहा पुलाव
मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन प्रधान शरबती देवी ने बताया कि योजना की हालत बेहद खराब है। निदेशालय की ओर से स्कूल में विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध करवाने को लेकर नया मेन्यू जारी किया गया है। जिसके तहत विद्यार्थियों को पुलाव, पूरी सब्जी, राजमा चावल, गुलगुले, कढ़ी चावल, खिचड़ी, मौसमी सब्जी परोसा जाना है। परंतु मील के लिए पैसा न होने के कारण विद्यार्थियों को मेन्यू के हिसाब से खाना नहीं दिया जा रहा है। अध्यापक राकेश कुमार, राजकुमार सैनी, नरेश, कुलवंत ने बताया कि वे विद्यार्थियों को केवल पुलाव ही परोस पा रहे हैं। सरकार की ओर से जुलाई में मई माह का बजट जारी किया गया था, जबकि जून से अब तक का बजट जारी करना बाकी है। अभी तक अध्यापक अपने स्तर पर उधार व जेब से रुपये खर्च कर सामान ला रहे थे, लेकिन अब दुकानदारों ने सामान देने से मना कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि वे इतना लंबा उधार देने में असमर्थ हैं। इससे उनके व्यापार पर असर पड़ रहा है।
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वर्जन
निदेशालय की ओर से मील को लेकर बजट जारी किया जाना है। बजट न आने के कारण अध्यापक परेशानी होने की शिकायत कर रहे हैं। इसके लिए निदेशालय को पत्र लिखकर बजट जारी करने की मांग की गई है। बजट आते ही सभी में आबंटित कर दिया जाएगा।
पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।