यमुनानगर। दीनबंधु छोटू राम थर्मल पॉवर प्लांट के अंदर 409.242 हेक्टेयर (1011.26 एकड़) भूमि पर 6900 करोड़ रुपये से लगने वाली नई 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के निर्माण का तकरीबन रास्ता साफ हो गया है। फरवरी में इसका निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रोजेक्ट के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लंबित पड़ी ईसी (इनवायरमेंट क्लीयरेंस) को लेकर बीती 30 दिसंबर को एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी की ऑनलाइन बैठक हुई थी। इसमें कई बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें कई पॉजिटिव प्वाइंट सामने आए हैं।
इनवायरमेंट क्लीयरेंस पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) को देनी है। ऐसे में 15 जनवरी तक ईसी की क्लीयरेंस मिल सकती है। इस परियोजना की ड्राइंग बनकर भी तैयार हो चुकी है और यूनिट को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की ओर से बनाया जाएगा, जिसका टेंडर काफी समय पहले हो चुका है।
2028 तक नया प्लांट बनकर तैयार होने के बाद बिजली उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। प्लांट प्रदूषण मुक्त तो होगा साथ ही 17.49 लाख मीट्रिक टन ऐश (राख) उत्पादन भी होगा, जबकि मौजूदा समय में 600 मेगावाट की यूनिट से 12.61 लाख मीट्रिक टन राख का उत्पादन हो रहा है। वहीं राख को स्टोर करने के लिए लापरा गांव में दो बड़े तालाब बनाए जा रहे हैं। जिनकी कुल क्षमता 43.62 लाख मीट्रिक टन होगी, जबकि वर्तमान में 5.91 लाख मीट्रिक टन के तालाब है जिनकी क्षमता 25.16 लाख मीट्रिक टन है। संवाद
नई यूनिट के लिए 22 क्यूसेक पानी की जरूरत
नई 800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के लिए 22 क्यूसेक पानी की भी आवश्यकता होगी। मौजूदा समय में दीनबंधु छोटू राम थर्मल पॉवर प्लांट की 600 मेगावाट यूनिट के लिए 19 क्यूसेक पानी उपयोग में हो रहा है। इतना ही नहीं नई यूनिट लगने के बाद जिले से कुल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। वहीं अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के लिए सहायक शक्ति 52 मेगावाट की आवश्यकता होगी। मौजूदा समय में सहायक शक्ति 48 मेगावाट है। इस तरह नए प्लांट के स्थापित होने के बाद 100 मेगावाट सहायक शक्ति की आवश्यकता होगी। नई यूनिट की खास बात यह रहेगी चिमनियां व कूलिंग टॉवर भी छोटे होंगे, 400 केवी लाइन अलग से बिछेगी।