यमुनानगर। दैनिक जीवन में हम रोजाना जितना पानी इस्तेमाल करते हैं उसमें से 60 प्रतिशत नालियों में ही व्यर्थ बह जाता है। जिस कारण यह पानी दोबारा हमारे किसी काम नहीं आता। परंतु जिले में दो-चार या सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों जगह ऐसी हैं जहां व्यर्थ बह रहे पानी का सदुपयोग करके इससे सब्जी, मसाले व फलदार पौधों की सिंचाई की जा रही है। इससे पानी की तो बचत हो ही रही है साथ में खाने के लिए बिना कीटनाशकों वाले फल व सब्जी मिल रही है।
दरअसल स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में करीब 3500 किचन गार्डन बनाए गए हैं। इससे रसोई घरों से व्यर्थ निकलने वाले पानी का इस्तेमाल खाली जगह में सब्जी समेत अन्य पौधों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इसके लिए लोगों को पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ा। केवल जागरूक करने भर से ही लोग किचन गार्डन के लिए आगे आए और नतीजा साफ दिख रहा है। रसोई घरों में बर्तन धोने व खाना बनाने से पहले दाल, सब्जी को धोने में ही काफी पानी इस्तेमाल होकर नाली में बह जाता है। स्वच्छ भारत मिशन की टीम ने इस बारे में लोगों को जागरूक किया। लोगों को बताया गया कि जाने-अनजाने में रोजाना वह जो पानी नालियों में बहा रहे हैं वह उसका सदुपयोग कर सकते हैं। शुरूआत में तो लोगों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली, लेकिन एक के बाद एक लोग आगे आ रहे हैं। जिस कारण जिले में 3500 किचन गार्डन बनाए जा चुके हैं। यह किचन गार्डन लोगों के घरों, आंगनबाड़ी केंद्र व राजकीय स्कूलों में बनाए गए हैं।
अब नल से नहीं देना पड़ता पानी
रतनगढ़ गांव की पिंकी ने बताया उसके घर की रसोई से पहले रोजाना सैकड़ों लीटर पानी बेकार बह जाता था। जब उसे पता चला कि इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है तो उसने किचन गार्डन बनाया। अब वह क्यारियों की सिंचाई नल से नहीं बल्कि रसोई के पानी से करती हैं। इसी तरह जयपुर गांव की संगीता ने जागरूकता दिखाते हुए किचन गार्डन बनाया और प्लॉट में लगाई गई सब्जी की सिंचाई रसोई के पानी से ही कर रही हैं। उसे देख कर कुछ और लोगों ने किचन गार्डन बनाया है।
संख्या बढ़ाई जाएगी: बलिंद्र कटारिया
स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक बलिंद्र कटारिया ने बताया कि जिले में करीब 3500 किचन गार्डन बन चुके हैं। जिला परिषद सीईओ वीरेंद्र ढुल की अध्यक्षता में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। व्यर्थ होने वाले पानी का सदुपयोग करके अपने घर के लिए सब्जी या फल तैयार कर सकते हैं। रसोई घर में लगी सिंक के पाइप को सीधे खाली प्लाॅट में बनाई गई क्यारियों या फिर गड्ढा खोद कर उसमें छोड़ा जाता है।इसके लिए लोगों को गांव-गांव जाकर जागरूक किया जा रहा है।