साढौरा। गांव लाहड़पुर में मारकंडा नदी का पानी तो खेतों से उतर गया है लेकिन खेतों में बर्बादी के निशान छोड़ गया हैं। खेतों में पानी आने के कारण अब वहां फसल के बजाय रेत ही नजर आ रही है। इस पानी से करीब 200 एकड़ से अधिक फसल बरबाद हो गई है। और 40 एकड़ जमीन कटाव होने से नदी में तबदील हो गई।
सुरेंद्र सैनी ने बताया कि लाहड़पुर में मारकंडा नदी के तेज बहाव के कारण रसूलपुर जाने वाली सड़क टूटने के अलावा पानी खेतों में जमा हो गया था। रविवार को इस रास्ते को ठीक करके आवाजाही के लिए खोल दिया गया, लेकिन खेतों में पानी उतरने के बाद तबाही के निशान नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाबू राम ने इस जगह पर स्थित पंचायत की 10 एकड़ जमीन को ठेके पर लेकर धान लगाया था, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण हुए कटाव से अब इस जमीन ने नदी का रूप ले लिया है। जिससे बाबू राम द्वारा लगाई गई धान की फसल कतई नष्ट होने से उसकी मेहनत पर पानी फिर गया है। बाबू राम के अलावा ज्ञानचंद, राज नरेश, सुशील व लालचंद सहित कई अन्य किसानों के लगभग 200 एकड़ खेतों में अब फसल की जगह रेत नजर आ रहा है। ज्ञानचंद व सुशील ने बताया कि रेत इतना अधिक है कि यह फसल तो क्या अगली कई फसलें लेना मुश्किल हो गया है। आम आदमी पार्टी के ब्लॉक प्रधान राजेश गोरा ने आरोप लगाया कि किसानों की हालत दयनीय हो जाने के बावजूद कोई भी किसानों को राहत देने तो क्या उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। उन्होंने खराब हुए खेतों का जल्दी सर्वे करवाकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।