संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के छोटे से गांव मिश्री का माजरा की महिलाओं ने सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सामूहिक आटा चक्की शुरू की है। अब गांव ही नहीं आसपास के ग्रामीण भी इसी चक्की पर गेहूं पिसवा रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।
एचआरएलएम के तहत गठित प्रोड्यूसर ग्रुप की इस पहल का शुभारंभ जिला कार्यक्रम प्रबंधक देवेंद्र शर्मा ने किया। गांव की प्रधान सोना देवी ने बताया कि वर्ष 2016 में 10 महिलाओं ने मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाया था। शुरुआत छोटी बचत से हुई, लेकिन नियमित बचत, बैठकों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर समूह ने अपनी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया।
इसी क्रम में समूह की महिलाओं ने अपनी बचत और सहयोग से गांव में आटा चक्की स्थापित की। पहले ग्रामीणों को गेहूं पिसवाने के लिए दूसरे गांवों में जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव में ही उपलब्ध होने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।महिलाएं खेती के साथ स्वरोजगार के अन्य माध्यम अपनाकर अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं।
उनका कहना है कि संगठित होकर कार्य करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। ग्रामीणों ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांव में आटा चक्की शुरू होने से रोजमर्रा की बड़ी सुविधा मिली है।
बीपीएम देवेंद्र राणा और ब्लॉक कॉर्डिनेटर कर्मजीत कौर ने भी समूह की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने महिलाओं से अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
स्वरोजगार के लिए किया जा रहा प्रेरित : देवेंद्र शर्मा
जिला कार्यक्रम प्रबंधक देवेंद्र शर्मा ने कहा कि जिले में करीब 47 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीहैं। मिशन की ओर से महिलाओं को प्रशिक्षण, बैंक लोन और स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनकर परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मिश्री का माजरा की महिलाओं की यह पहल अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणादायी है।
गांव मिश्री का माजरा में आटा चक्की के पास मौजूद महिलाएं। संवाद