यमुनानगर। जिले में पॉपुलर का रकबा लगातार बढ़ रहा है। किसानों के लिए पॉपुलर भले ही मुनाफे का सौदा है, लेकिन इससे सरस्वती शुगर मिल को नुकसान उठाना पड़ रहा है। शुगर मिल की ओर से हर साल की जाने वाली स्ट्डी तो यही कह रही है। पॉपुलर के बढ़ते रकबे की वजह से मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिलता है। पॉपुलर का गन्ने की गुणव्ता पर भी असर पड़ रहा है, जिससे चीनी की रिकवरी में दो प्रतिशत तक कमी आई है।
इस बार जिले में पॉपुलर का रकबा 24 हजार एकड़ के पार जाने का अनुमान है। पिछले कुछ सालों से किसानों का पॉपुलर लगाने का रुझान बढ़ा है। पहले ज्यादातर किसान गन्ने की फसल के साथ ही पॉपुलर लगाते थे। अब गन्ना लगाना छोड़ सारे खेत में पॉपुलर ही लगा रहे हैं। इससे जिले में गन्ने का रकबा लगातार घट रहा है।
जिले में हर साल कितने एकड़ में गन्ना लगा है और पेराई सत्र खत्म होने के बाद शुगर मिल में गन्ना कम पहुंचने का क्या कारण रहा इसके लिए मिल की तरफ से हर साल मई व जून माह में सर्वे कराया जाता है। इसमें यह बात सामने आई है कि पॉपुलर के प्रति बढ़ रहे किसानों के मोह की वजह से गन्ने का रकबा घट रहा है।
शुगर मिल की स्ट्डी में सामने आया है कि पिछले साल गन्ने का जो रकबा था उसमें 35 प्रतिशत में पॉपुलर के पेड़ लगे थे। इस बार यह 45 प्रतिशत तक जाने का अनुमान है। दूसरा पॉपुलर लगाने के पहले साल में गन्ने का उत्पादन 25 प्रतिशत कम होता है। जबकि दूसरे साल में उत्पादन 100 क्विंटल से भी कम रह जाता है।
किसान गन्ने की फसल में यूरिया, कीटनाशक समेत अन्य दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे गन्ने की पैदावार बढ़ती है। यदि साथ में गन्ना लगा हो तो दवाए व कीटनाशक पॉपुलर के पेड़ों पर भी असर करते हैं। जिससे गन्ने के पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते। दूसरा जब पॉपुलर के पेड़ बड़े होते हैं तो उनके पत्तों की छाया से गन्ने को प्राकृतिक पोषक तत्व नहीं मिलते।
गन्ने की कमी के चलते पिछले साल सरस्वती शुगर मिल समय से पहले ही बंद हो गई थी। शुगर मिल ने 175 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा था। 157 दिनों तक चली शुगर मिल में 146 लाख 63 हजार क्विंटल गन्ने की ही पेराई हुई थी ,जो 2023 के 20 लाख 27 हजार क्विंटल कम थी। गन्ना न मिलने से मिल को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार मिल ने 160 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यमुनानगर में सैकड़ों की संख्या में प्लाईवुड उद्योग लगे हैं। प्लाई बनाने के लिए सफेदा व पॉपुलर लकड़ी की बहुत ज्यादा खपत होती है। इससे पॉपुलर की बहुत ज्यादा मांग है। इस वक्त अच्छी क्वालिटी का पॉपुलर 1650 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वर्ष 2003 में पॉपुलर 160 से 170 रुपये क्विंटल था। 2006 में इसका रेट 500 रुपये तक पहुंच गया। वहीं पॉपुलर की कीमतें डिमांड व सप्लाई पर निर्भर करती हैं। जब-जब पॉपुलर का रकबा बढ़ा है, इसकी कीमतों में भी कमी आई है। जब पॉपुलर की आवक कम हुई है तो कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
सरस्वती शुगर मिल के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट डीपी सिंह का कहना है जिस खेत में पॉपुलर लगा है उसमें गन्ने का उत्पादन पहले साल 25 प्रतिशत व दूसरे साल में 50 प्रतिशत से अधिक कम हो जाता है। साथ ही क्वालिटी खराब होने से चीनी की रिकवरी भी दो प्रतिशत कम हो जाती है। जिससे मिल को नुकसान हो रहा है। अब कितने एकड़ में गन्ना व पॉपुलर साथ लगे हैं इसका सर्वे मई में कराया जाएगा। संवाद