संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। तीज पर्व की पहचान माने जाने वाले घेवर पर महंगाई की मार पड़ी है। घी, चीनी, मैदा, खोया और रसोई गैस की बढ़ी कीमतों ने घेवर इस बार 50 से 70 रुपये प्रति किलो तक ज्यादा महंगा हो गया है। मिष्ठान विक्रेताओं का कहना है कि लागत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहकों को राहत देने के लिए दाम सीमित रखे गए हैं।
तीज का त्योहार नजदीक आते ही शहर के मिष्ठान भंडारों पर घेवर की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार घी, चीनी, मैदा और गैस सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घेवर और फिरनी के दामों पर भी पड़ा है। पिछले साल 350 रुपये प्रति किलो बिकने वाला घेवर इस बार 400 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कई जगह इसका रेट 420 रुपये तक है। फिरनी के दाम भी बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
जिले में करीब 550 से ज्यादा मिष्ठान भंडार हैं, जहां तीज पर्व को देखते हुए घेवर तैयार किए जा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है। तीज पर रिश्तेदारों और परिवार के लिए घेवर ले जाने की परंपरा है, लेकिन बढ़ी कीमतों के कारण इस बार बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है।
मिष्ठान विक्रेता शौरभ, सोनू, निखिल और नीलम ने बताया कि घेवर बनाने में चीनी, मैदा, घी, खोया और बादाम का इस्तेमाल होता है। इन सभी की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसके बावजूद ग्राहकों पर अधिक बोझ न पड़े, इसलिए केवल नाममात्र की बढ़ोतरी की गई है।
गांव पंजेटो का माजरा निवासी मंजू रानी ने कहा कि पहले ही घरेलू बजट महंगाई से प्रभावित है। ऐसे में त्योहारों पर महंगी मिठाइयां खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं रह गया है। इससे त्योहारों की मिठास भी फीकी पड़ती नजर आ रही है।
जगाधरी के राहुल शर्मा ने कहा कि तीज पर घेवर खरीदने की परंपरा आज भी कायम है, लेकिन इस बार बढ़ी कीमतों के कारण लोग कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं या फिर अन्य मिठाइयों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं।
दड़वा गांव के ईशमपाल ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से त्योहारों पर मिठाइयों का खर्च बढ़ गया है, जिससे लोग जरूरत के अनुसार ही खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों को उम्मीद है कि तीज आते-आते ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और तेजी आएगी।