संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। थैलेसीमिया मरीजों हर 10 से 15 दिन बाद शरीर में रक्त चढ़वाना पड़ता है। वहीं बीमारी से जीतने के लिए दिन में कई बार नियमित दवा खानी पड़ती है। जिला नागरिक अस्पताल में डेढ़ माह से थैलेसीमिया मरीजों को दी जाने वाली दवा खत्म है। मजबूरी में मरीजों को बाजार से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। यह हालात तब हैं, जब पिछले तीन माह में तीन मरीजों की जान जा चुकी है।
जिले में थैलेसीमिया के कुल 121 मरीज वर्तमान में हैं। इनमें 70 प्रतिशत बच्चे हैं। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चाें काे महीने में एक या इससे भी ज्यादा बार खून चढ़ाना पड़ता है। रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसे में आयरन की मात्रा को कंट्रोल करने तथा अन्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बरकरार रखने के लिए बच्चों को दिन में दो से तीन बार एक गोली खिलाई जाती है।
यह दवा पीड़ितों को जिला नागरिक अस्पताल से ही मिल जाती थी। अस्पताल से कैल्फर टैबलेट और डेसीरॉक्स दवा नियमित नहीं आ रही। थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों की माने तो डेढ़ माह से दवा बिल्कुल भी नहीं आ रही है। तब से लोगों को अपने बच्चों के लिए बाजारसे दवा खरीदनी पड़ रही है। एक गोली की कीमत करीब 30 रुपये है। रोग के हिसाब से एक दिन में दो से तीन गोली खिलानी पड़ती है। इसलिए रोजाना का औसतन खर्च 100 रुपये है। महीने में उन्हें 3000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष रमन मोंगा का कहना है कि दवा न मिलने थैलेसीमिया के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों को यह दवाई बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
पहले से पीड़ित बच्चों के माता-पिता पर और आर्थिक बोझ बढ़ गया है। वहीं थैलेसीमिया पीड़ितों को पेंशन देने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी, जो अब तक नहीं मिली है। लोग पेंशन के लिए समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में जाते हैं, लेकिन वहां से एक ही जवाब मिलता है कि उनके पास पत्र आएगा तो पेंशन लगा देंगे।
थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए दवा मुख्यालय से ही खरीदी जाती है। हम अपनी डिमांड भेज कर दवा मंगवा लेते हैं। फिलहाल कुछ दिन से टैबलेट की कमी चल रही है। एक दिन पहले ही मरीजों के लिए 80 इंजेक्शन दूसरे वेयरहाउस से मिले हैं। 600 इंजेक्शन जल्द ही आने वाले हैं। जिन तीन मरीजों की मौत हुई है, उनकी मौत दवा न मिलने की वजह से नहीं हुई है। इसका कोर्स भी पूरा करना होता है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।