नौ वर्षीया बच्ची के साथ उसके सौतेले बाप और एक अन्य द्वारा दुराचार करने
का मामला प्रकाश में आया है। मेडिकल करवाने पर उससे दुराचार की पुष्टि हुई
है।
शहर पुलिस ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी की शिकायत पर पीड़िता के सौतेले
बाप के खिलाफ दुराचार का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि
किसी अन्य द्वारा बच्ची से दुराचार की बात को पुलिस नकार रही है। फिलहाल
बच्ची को बालकुंज में रखा गया है।
शहर पुलिस को दी शिकायत में जिला बाल
संरक्षण अधिकारी ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्हें फोन से सूचना मिली थी कि
छोटी लाइन स्थित एक प्राइवेट स्कूल के एक कमरे में एक महिला नौ साल की
बच्ची और पांच साल के बच्चे के साथ रह रही है। हालांकि दोनों बच्चे उसके
नहीं हैं।
बच्चों का पिता महिला को उनकी देखभाल के लिए पैसे देता है। फोन
करने वाले ने यह भी बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा बच्ची का यौन शोषण किया
जा रहा है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तुरंत टीम के साथ मौके पर पहुंच कर
दबिश दी और दोनों बच्चों से इस संदर्भ में पूछताछ की।
बच्ची ने जांच टीम
को बताया कि उसके सौतेले पिता ने उसका यौन शोषण किया। इसके बाद मामले की
सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने जब बच्ची का मेडिकल करवाया, तो उसमें उसके
साथ दुराचार की पुष्टि हुई है। पुलिस ने बच्ची के सौतेले पिता मुन्ना के
खिलाफ दुराचार का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बाल संरक्षण
अधिकारी ने बताया कि जब उन्होंने काउंसलर्स से बच्ची की काउंसिलिंग करवाई,
तो उसने बताया कि एक अन्य व्यक्ति ने भी उसके साथ दुराचार किया है, जबकि
पुलिस इस बात को सिरे से नकार रही है।
रिचा के मुताबिक बच्ची ने काउंसलर को
बताया कि एक अन्य व्यक्ति उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। जिसने उसके
पिता की तरह उसने भी उसके साथ गलत काम किया। बच्ची का कहना है कि अगर वह
व्यक्ति उसके सामने आ जाएगा, तो वह उसे पहचान लेगी। कानून के जानकारों का
कहना है कि इस मामले में उस अज्ञात के खिलाफ भी दुराचार का केस दर्ज होना
चाहिए, जो बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। लेकिन पुलिस महज जांच
की बात कहकर इससे पल्ला झाड़ने में लगी है। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान
रणबीर सिंह खरकाली तथा एडवोकेट अजय वर्मा का कहना है कि कानूनन पुलिस को
चाहिए कि वह इस मामले में भादंसं की धारा 376 जी के तहत मामला दर्ज करना
चाहिए। इसके अलावा जिस महिला के पास बच्ची रह रही थी, उसके खिलाफ भादंसं की
धारा 120 बी के तहत केस दर्ज होना चाहिए।