संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी जयंती भारती ने शिक्षा और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि वैदिक काल में गुरुकुल शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना होता था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से भौतिक उपलब्धियों तक सीमित होती जा रही है, जिसके कारण युवाओं में स्वार्थ, अहंकार और प्रतिस्पर्धा की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। आध्यात्मिक शिक्षा के अभाव में मानवता और नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। कथा के दौरान साध्वी जयंती भारती ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जनकल्याण और धर्म की स्थापना के लिए अवतार धारण किया था। प्रभु जब साकार रूप में पृथ्वी पर अवतरित होकर कार्य करते हैं तो उसे लीला कहा जाता है, क्योंकि वे स्वयं सांसारिक बंधनों में नहीं बंधते, बल्कि जीवों को मोह और बंधनों से मुक्त कराने के लिए आते हैं।
कथा में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और भक्ति रस का आनंद लिया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को सुनकर आध्यात्मिक और नैतिक जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया। संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि कथा का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक शिक्षा का प्रसार करना है।