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Yamuna Nagar News: विकास कार्यों की गुम एमबी का खुलेगा राज, होगी जांच

Sun, 06 Aug 2023 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी कार्यालय से गुम विकास कार्यों की एमबी (पैमाइश पुस्तिकाओं) के राज से पर्दा उठ सकता है। मामले की जांच यूएलबी (अर्बन लोकल बॉडी) के चीफ विजिलेंस ऑफिस को दे दी गई है। इस संबंध में उन्हें यूएलबी के कमिश्नर एंड सचिव ने एक अगस्त को पत्र जारी किया। पत्र में चीफ विजिलेंस ऑफिस को जांच कर शीघ्र रिपोर्ट भेजने का अनुरोध किया गया है।
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जानकारी के अनुसार मामले में आजाद नगर निवासी सोम प्रकाश सीएम विंडो के अलावा कई जगह शिकायतें देने के साथ आरटीआई भी लगा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अकाउंट जनरल ने वर्ष 2019 में नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने लिखा था कि निगम कार्यालय से 78 एमबी गायब हैं। इसके बाद उन्होंने सीएम विंडो के अलावा निगम अधिकारियों से भी शिकायतें की, पर जवाब नहीं मिला। आरटीआई में भी सवालों के जवाब नहीं मिले। तब उन्होंने पूरा मामला फरीदाबाद विधायक नीरज शर्मा को बताया। जिन्होंने विधानसभा की संसदीय कमेटी में यह मामला उठाया। इस पर हरियाणा सरकार में चौकसी विभाग के मुख्य सचिव ने संज्ञान लेकर ये मामला यूएलबी के कमिश्नर एंड सेक्रेटरी के पास भेज दिया। जिन्होंने एक अगस्त को यूएलबी के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को पत्र जारी कर शिकायतों पर जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा है। सोम प्रकाश ने बताया कि यह पत्र उनके पास भी आया है।
शिकायतों में लगाए ये आरोप
सोम प्रकाश ने शिकायतों में आरोप लगाए कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अधिकारियों, कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार की ओर से भेजे जाने वाली अनुदान राशि के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों में भारी धांधली, लूट-खसोट व भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संबंधित साक्ष्य को छुपाते हुए विकास कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज पैमाइश पुस्तिकाओं और विकास कार्यों संबंधी फाइलें व अन्य दस्तावेजों को गायब व खुर्दबुर्द कर प्रदेश सरकार को वित्तीय हानि पहुंचाई गई है।
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एमबी में होता कार्यों का पूरा ब्योरा, उसी से होती ठेकेदार की पेमेंट
सोम प्रकाश ने बताया कि हर विकास कार्य की एमबी बनती है, जिसमें कार्य का विस्तृत ब्योरा होता है। एमबी के आधार पर ही जेई संबंधित ठेकेदार या एजेंसी को भुगतान कराता है। किंतु एमबी गायब होना कार्यों में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है, क्योंकि इतनी एमबी गुम हुईं, पर सभी के लिए अफसरों ने एफआईआर नहीं कराई। नियमानुसार यह सरकारी रिकॉर्ड गुम होने पर एफआईआर होनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए मामले में जांच की मांग है।
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