रोजापीर दरगाह साढौरा में सजदा करते किन्नर समाज के लोग। स्वयं
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साढौरा। साढौरा गद्दी के किन्नर अनुयायियों ने मंगलवार को रोजापीर दरगाह पर चादरपोशी की। उन्होंने आवाम की भलाई और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। किन्नर गुरु महंत विजेता ने बताया कि यह परंपरा करीब 450 साल पुरानी है। गद्दी के संस्थापकों ने रोजापीर को अपना गुरु माना था। दरगाह के 456वें उर्स में दूरदराज से कई किन्नर पहुंचे थे। सूफी संत सैयद कादर शाह कुमैशुल आजम की शिक्षाओं से प्रभावित होकर गद्दी नाहन से साढौरा स्थानांतरित हुई। आज भी साढौरा की प्राचीन मस्जिद में स्थित गद्दी को गुरु गद्दी मानते हैं। हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश के अनुयायी हर वर्ष उर्स में आते हैं। वे शोभायात्रा निकालकर दरगाह पहुंचते हैं और अमन-चैन व रोजगार के लिए दुआ मांगते हैं। महंत विजेता समाजसेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं। इस दौरान कई अन्य किन्नर उपस्थित रहे। संवाद