संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान और दिन में चल रही तेज हवाओं ने गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो फसल के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो गेहूं का दाना पिचकने की आशंका बढ़ जाएगी।
जिले में करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। इस समय फसल दाना भरने की अवस्था में है, जिसे सबसे संवेदनशील चरण माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और शुष्क तेज हवा चलने से दाने का विकास प्रभावित होता है।
अधिक गर्मी से दाने में नमी कम हो जाती है और पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप दाना पतला और हल्का रह जाता है, जिससे उपज में कमी आना तय है। दिन के समय चल रही तेज हवाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। हवाओं के कारण खेतों में नमी तेजी से उड़ रही है।
ऐसे में यदि समय पर सिंचाई न की जाए तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना व भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान ने बताया कि किसान तापमान को देखते हुए अतिरिक्त सिंचाई कर रहे हैं, ताकि फसल को राहत मिल सके। हालांकि, बार-बार सिंचाई करने से लागत भी बढ़ रही हैै। मौसम के इस तेवर ने किसानों को असमंजस में डाल दिया है। किसानों को एक ओर लागत बढ़ने की चिंता है तो दूसरी ओर उपज घटने का खतरा भी है।
फसल की नियमित करें निगरानी : डॉ. अरोड़ा
कृषि विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा का कहना है कि किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए। जहां संभव हो, हल्की सिंचाई कर मिट्टी में नमी बनाए रखना जरूरी है। साथ ही, खेतों में पोषक तत्वों की कमी न हो इसका भी ध्यान रखने की सलाह दी गई है। यदि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ता है और साथ में तेज हवा चलती है तो पैदावार में गिरावट से इन्कार नहीं किया जा सकता है।