संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी में 24 लाख 45 हजार रुपये से बनाए गए विश्राम गृह पर ताला लटका है। यह विश्राम गृह व्यवस्था के सिस्टम में ऐसा उलझा कि न तो यह अधूरा ही है और न ही पूरा। नगर निगम कागजों में इसका काम पूरा दिखा चुका है, जबकि हालत इसकी ऐसी है जैसे कार खड़ी करने का कोई गैराज हो। नगर निगम इसके लिए पीडब्ल्यूडी को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि निगम काम पूरा कराएगा।
जगाधरी के अस्पताल में 24 घंटे मरीज भर्ती रहते हैं। जिनसे मिलने के लिए उनके परिजन व रिश्तेदार आते रहते हैं। मरीजों के तीमारदारों को सबसे ज्यादा दिक्कत रात के समय ठहरने में आती थी। वह दिन-रात कभी भी अस्पताल में ही ठहर सकें इसके लिए वर्ष 2014 में अस्पताल में उनके लिए विश्राम गृह बनाने की योजना बनी।
इसके बाद हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) ने नवंबर 2015 से अलग-अलग किस्तों में करीब 24 लाख 45 हजार रुपये नगर निगम को दिए। नगर निगम ने विश्राम गृह बनाने का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को दिया। नवंबर 2018 तक विश्राम गृह का काम पूरा करना था, लेकिन काम में देरी होती चली गई। ऐसी देरी हुई कि सात साल बाद भी यह दो मंजिला विश्राम गृह आज तक बनकर तैयार नहीं हुआ है।
सब डिवीजन अस्पताल जगाधरी के एमएस डॉ. अनुज मंगला ने कार्यभार संभालने के बाद अधूरे विश्राम गृह पर संज्ञान लिया। इसके लिए उन्होंने 11 मार्च को पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा। जिस पर 24 मार्च को पीडब्ल्यूडी की तरफ से जवाब आया कि विश्राम गृह का बचा हुआ काम नगर निगम को ही पूरा करना है।
इस पर एमएस ने नगर निगम में आयुक्त को पत्र लिखा तो वहां से जवाब आया कि उन्हें 24 लाख 45 हजार रुपये मिले थे। इससे जो काम होना था वह 30 मार्च 2020 तक पूरा करवा दिया गया है। काम पूरा करने के लिए 5.55 लाख रुपये हुडको से और मांगे गए थे जो आज तक नहीं मिले।
दोनों विभागों को लिख चुके पत्र : डॉ. अनुज मंगला
जगाधरी अस्पताल के एमएस डॉ. अनुज मंगला का कहना है कि अस्पताल परिसर में बने विश्राम गृह को पूरा कराने के लिए वह नगर निगम व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिख चुके हैं। दोनों ही विभाग काम पूरा करने से मना कर रहे हैं। वह इस बारे में डीसी से मिलेंगे। बाहर से दीवार फांद कर शरारती तत्व इस विश्राम गृह में घुस जाते थे इसलिए उन्होंने अपने स्तर पर दीवार पर कांटेदार तार लगवाई थी।