संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कांग्रेस आलाकमान ने जैसे ही आगामी एक माह में प्रदेश के सभी जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की, उसी समय इसे लेकर जिले में भी सरगर्मियां तेज हो गई।
कई नेता कांग्रेस जिलाध्यक्ष का ताज पहनना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने भागदौड़ शुरू कर दी है। दावेदारों ने नीचे से लेकर ऊपर तक अपने पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया।
पार्टी के आला नेताओं के उस बयान ने नेताओं की परेशानी बढ़ा दी है जिसमें कहा गया है कि 35 से 55 साल के नेताओं को ही जिलाध्यक्ष की कुर्सी मिलेगी। यदि इस पर अमल हुआ तो जिलाध्यक्ष की दौड़ से आधे से ज्यादा नेता बाहर हो जाएंगे। जिले में कांग्रेस के इस वक्त जो सबसे ज्यादा नेता सक्रिय हैं उनमें से ज्यादातर की आयु 55 को को पार कर चुकी है। 55 साल की शर्त लगती है तो जिलाध्यक्ष नहीं बन पाएंगे। इससे उनमें अंदरूनी तौर पर निराशा तो है, लेकिन हिम्मत नहीं हारी है।
जो नेता जिलाध्यक्ष बनने के कतार में हैं, समर्थकों ने भी उनके ईद-गिर्द चक्कर लगाने शुरू कर दिए। अब इंतजार 4 जून को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक का है। इसी बैठक में नए जिलाध्यक्षों को लेकर आगामी रणनीति बनेगी। अपने सूत्रों से यह भी पता लगाया जा रहा है कि यमुनानगर के पर्यवेक्षकों की कमान किन्हें मिलेगी। पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं से मिलकर उनकी नब्ज टटोलेंगे।