संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन आवर में त्वरित और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की सरकारी योजना जिले में कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है। सरकारी समेत 45 निजी अस्पतालों को चिन्हित किए जाने के बावजूद अनुबंधित निजी अस्पताल घायलों का डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज करने में सहयोग नहीं कर रहे। नतीजतन पुलिस को मजबूरी में घायलों को सिविल अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर में ही ले जाना पड़ रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से गत वर्ष शुरू की गई योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति का मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 162 के अंतर्गत अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज किया जाना है। प्रावधान है कि हादसे के बाद घायल को तुरंत अनुबंधित निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा और उसके परिजनों की तलाश में समय न गंवाते हुए इलाज शुरू किया जाएगा।
तय सीमा तक का खर्च सड़क एवं परिवहन मंत्रालय वहन करेगा, जबकि इससे अधिक राशि होने पर अतिरिक्त बिल परिजनों को चुकाना होगा। योजना के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को अपने सॉफ्टवेयर में घायल का डाटा अपलोड कर संबंधित थाना पुलिस को भेजना होता है। थाना पुलिस छह घंटे के भीतर सड़क दुर्घटना की पुष्टि करती है, जिसके बाद कैशलेस उपचार की प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया अटक रही है।
योजना लागू न करने के पीछे निजी अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग व पुलिस को तर्क दिया है कि सरकार द्वारा तय दरें वास्तविक खर्च से काफी कम हैं। कई अस्पतालों का कहना है कि आईसीयू का एक दिन का खर्च लगभग तीन से चार हजार रुपये आता है, जबकि उन्हें सरकार से मात्र एक हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान प्रस्तावित है। इसके अलावा भुगतान समय पर नहीं मिलने की भी शिकायत है। कुछ संचालकों ने आयुष्मान योजना के करोड़ों रुपये बकाया होने का हवाला देते हुए कहा कि पिछली देनदारियां अटकी हुई हैं, ऐसे में नई योजना के तहत जोखिम लेना मुश्किल है।
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि हादसे के बाद का पहला घंटा गोल्डन आवर होता है। यदि इस दौरान सही उपचार मिल जाए तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। निजी अस्पताल घायलों को डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने से बच रहे हैं। समय पर उपचार मिलना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
बैठक में नहीं बनी सहमति : कुशलपाल
यातायात थाना प्रभारी कुशलपाल राणा ने बताया कि इस मुद्दे पर पुलिस और सिविल सर्जन के बीच बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। हाल ही में हुई सड़क सुरक्षा कमेटी की बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। डीसी व एसपी ने इस संबंध में जल्द कोई निर्णय लेने को कहा है ताकि किसी भी घायल की समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से जान न जा सके।