यमुनानगर। लंपी वायरस पशुपालकों की लगातार मुसीबत बढ़ा रहा है। जिले में नए मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। इतना ही नहीं इसकी चपेट में आने से पशुओं की मौत भी हो रही है। बुधवार को 633 नए मामले आने के बाद अब पशुपालन विभाग के रिकार्ड में लंपी वायरस से ग्रस्त पशुओं की संख्या 9 हजार 33 हो गई है। उधर अधिकारियों का कहना है कि अब तक लंपी वायरस से ग्रस्त मिले गोवंशों में से 4400 स्वस्थ हो चुके हैं।
हरियाणा में लंपी वायरस के सबसे अधिक केस यमुनानगर में हैं। यहां जून से केस आने लगे। शुरुआत रादौर के गांवों से हुई। जुलाई तक रादौर के सैकड़ों गांवों में एक हजार गोवंश में पशुपालन विभाग की टीम को लंपी वायरस के लक्षण मिले। इसके बाद जिले के अन्य देहात व शहरी क्षेत्रों में एक के बाद एक केस बढ़ते गए। अब भी रोज सैकड़ों केस बढ़ रहे हैं। वायरस के लक्षणों के बाद गोवंश की मौत का आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में 25 है, पर अधिकांश गोवंश की मौत में अफसर अकेले वायरस को वजह नहीं मान रहे बल्कि उनकी माने तो पुरानी बीमारियों के साथ लंपी वायरस से मिक्स इंफेक्शन हुआ तो गोवंश की मौत हुई।
कई गोशालाओं में बीमार गोवंश के प्रवेश पर रोक
कई गोशालाओं में लंपी वायरस के लक्षण वाले गोवंश के प्रवेश पर रोक लगा दी है, ताकि गोशालाओं में मौजूद गोवंश को लंपी वायरस से बचाया जा सके। ऐसे में पहले से सड़कों पर काफी संख्या में लावारिस गोवंश अधिक है, वहीं कई पशुपालक भी अपनी गाय छोड़ रहे हैं। जिनके रख-रखाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे गोवंश की सेवा में गोरक्षक ही दिख रहे हैं। गोसंवर्धन न्यास की टीम रात में भी वायरस के लक्षण वाले व स्वस्थ गोवंश पर नीम-फिटकरी का छिड़काव कर उन्हें दवा-खाना दे रहे हैं। सेवा में रोहित चौधरी, दीक्षित शर्मा, विवेक, जतिन, गुरदत्ता सिंह, अनिल पुनानी लगे हुए हैं।
गोरक्षकों की प्रशासन से मांग-
-संक्रमित गायों की मंडियों व स्टेडियमों में रखने व इलाज की व्यवस्था हो।
-गोरक्षकों को स्प्रे पंप मुहैया कराए जाएं।
-प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग कराई जाए।
पहले पशु पालक लंपी वायरस के प्रति कम जागरूक थे। विभागी टीमों ने इसके प्रति जागरूक किया। जिस पर पशु पालक पूरी एहतियात बरत रहे हैं। इसका असर ये हुआ कि वायरस के लक्षणों से ग्रस्त गोवंशों की रिकवरी दर बढ़ने लगी है। अब तक लंपी वायरस के संदिग्ध मामले 9033 हैं, जिनमें 4400 गोवंश स्वस्थ भी हो चुके हैं।
- डॉ. सतबीर, एसडीओ, पशुपालन विभाग।