यमुनानगर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी शुक्रवार को जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक लेने पहुंचे। इस दौरान बिजली निगम के कर्मचारियों की ओर से सुनवाई नहीं किए जाने पर उन्होंने कई सवाल उठाए। एक महिला की शिकायत का निपटान करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों से सभी लोग परेशान हैं। पुलिस वाले तो फिर भी लोगों की सुन लेते हैं, लेकिन बिजली वाले किसी की सुनते नहीं। इनका तो न कोई वकील है और न ही कोई दलील इनके सामने काम आती है। बिजली कर्मचारी विरोधी पार्टी से मिलकर लोगों को परेशान करते हैं। इस पर बिजली निगम जगाधरी डिवीजन के एक्सईएन पवन चिकारा ने मंत्री जी को जवाब दिया कि ऐसा नहीं है।
मंत्री जी को दी शिकायत में मुसिंबल गांव की अमरजीत कौर ने बताया कि आठ अप्रैल को बिजली निगम के कर्मचारियों ने उसके घर की तार छज्जू नगला की लाइन से जोड़ दी। अब पड़ोसी बिजली की तार हटाने और पैसे मांगने का दबाव बना रहे हैं। आरोप है कि बिजली निगम के कर्मचारी आरोपियों से मिले हुए हैं। इस पर एक्सईएन ने अपनी रिपोर्ट दी कि उन्होंने दोनों पक्षों का समझौता करवा दिया है। शिकायतकर्ता अब संतुष्ट है। संवाद
मंदबुद्धि को छह साल पेंशन देकर कर दी बंद
आर्य नगर जगाधरी वर्कशॉप के धर्मवीर ने मंत्री को बताया कि उसका भाई कर्मवीर मंदबुद्धि है। सारे दस्तावेज जमा कराने के बाद पिछले छह साल से उसे जिला समाज कल्याण विभाग से पेंशन मिल रही थी। परंतु फरवरी 2024 से उसकी पेंशन रोक दी गई। अधिकारी कहते हैं कि वह हरियाणा के निवासी नहीं हैं, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती। शिकायतें करके वह थक चुके हैं। इस पर अधिकारियों ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि निदेशालय से दूसरे राज्य का बताते हुए उसकी पेंशन रोक दी गई थी। इसकी रिवेरिफिकेशन की गई तो कार्यालय से पत्र लिखा गया। क्रिड विभाग से वेरिफाई डाटा अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा, जिस कारण पेंशन बहाल नहीं की जा सकी।
बैठक में स्पीड ब्रेकर बनाने जैसी मांग भी रखी
जो शिकायतें अधिकारियों को अपने स्तर पर निपटा लेनी चाहिए या फिर जिनके सुझलाने में कोई अड़चन भी नहीं है ऐसी शिकायतें हर बार कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री के पास पहुंच रही हैं। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बैठक सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने, पीने का पानी नहीं आने और नाला जाम होने जैसी शिकायतें भी आ रही हैं। जबकि ऐसे मामलों को गांव में बीडीपीओ, एसडीएम, जनस्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग व शहर में नगर निगम के अधिकारी अपने स्तर पर दूर करवा सकते हैं। परंतु ऐसा नहीं हो रहा। इसके साथ ही जो मामले कोर्ट में चल रहे हैं उन्हें भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में शामिल किया जा रहा है। काफी चर्चा के बाद इनका निष्कर्ष एक ही निकलता है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए वह इसमें कुछ नहीं कर सकते।