संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के जगाधरी, साढौरा, सरस्वती व रादौर खंड की 251 पंचायतों में वाटर लेवल में सुधार के लिए अटल भूजल योजना संचालित की जा रही है। इसमें 28 पंचायतों के वाटर लेवल में सुधार होता दिखाई दे रहा है। यह सात से आठ फीट ऊपर तक पहुंच गया है। अभी भी 223 पंचायतों में भूजल स्तर में सुधार के लिए कार्य किया जा रहा है। पिछले कई सालों से इन पंचायतों में लगातार भूजल लेवल नीचे जा रहा था। यह स्थिति भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। जगाधरी, सरस्वतीनगर, साढौरा ब्लॉकों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
अभी तक सुधार न हो पाने का एक कारण यह भी
जिले में अभी तक गिर रहे भूजल स्तर का मुख्य कारण धान (जीरी) व गन्ना की फसल की सिंचाई के लिए पानी की खपत अधिक होना है। औद्योगिक और घरेलू गतिविधियों के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग भूजल स्तर में गिरावट का मुख्य कारण है। अटल भूजल योजना की रिपोर्ट के अनुसार धान में 1100 मिली मीटर तथा गन्ने की फसल में 2100 मिली मीटर सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है जो कि काफी अधिक है। ऐसे में यदि किसान धान में डीसीआर विधि का उपयोग करें तो सिंचाई के दौरान पानी की खपत कम होगी।
सुधार के लिए बांटा बाजारा
भूजल लेवल में सुधार के लिए अटल भूजल योजना के तहत 251 पंचायतों में किसानों को बाजरे का बायो 448 बीज बांटा गया, जगाधरी, सरस्वतीनगर, साढौरा व रादौर खंडों की पंचायतों में 93 पीजोमीटर लगाए गए। 500 यूथ एंबेसडर के अलावा भूजल सहेलियां तथा गांवों में भूजल सुधार के प्रति जागरूक करने के लिए फ्लेक्स बोर्ड इत्यादि कार्य किए जा चुके हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जिला सलाहकार रजनी गोयल भी 14 सालों से भूजल स्तर बनाए रखने के लिए कार्य कर रही हैं। इसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
प्रथम स्तर पर 251 पंचायतों में 28 पंचायतों में भूजल स्तर सुधरा है। यह पॉजीटिव प्वाइंट है। 223 में पंचायतों में भी वाटर लेवल में सुधार होगा। लेकिन इसके लिए समय लगेगा। जहां पर लेवल में सुधार हुआ है वहां चौवा सात से आठ फीट ऊपर तक पहुंच गया है। भूजल स्तर को सामान्य रखने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
-भूपेंद्र सिंह, आईईसी विशेषज्ञ अटल भूजल योजना।