संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। खारवन गांव के नजदीक से निकल रही पश्चिमी यमुना नहर में कटाव के कारण किसानों की मेहनत के साथ जमीन पानी समा रही है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गईं। अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी अभी तक कोई सुध लेने नहीं पहुंचा, ऐसे में अब उन्हें कृषि मंत्री कंवरपाल से आस है।
जिन किसानों की फसल भूमि कटाव के कारण यमुना में समा गई, उन्हें काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में वे मंगलवार को मंत्री के निवास पर मिलेंगे। खारवन के किसान सतीश कांबोज, अनिल कुमार, राज कुमार पृथ्वी राज, राजकरण, राम कुमार, रिंकू, जसविंद्र व उपजीत ने बताया कि खारवन से कश्मीरगढ़ तक करीब सात किमी तक कई दिनों से पश्चिमी यमुना के पानी से भूमि कटाव हो रहा है। ऐसे में खारवन के अलावा भगवान व कश्मीरगढ़ के किसानों की काफी जमीन फसल के साथ पानी में बह चुकी है।
उल्लेखनीय है पश्चिमी यमुना नहर को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। एक हिस्सा तो पक्का कर दिया है दूसरी साइड कच्ची छोड़ दी गई है। कच्चे किनारों पर कटाव शुरू हो गया है। किनारों पर सिंचाई विभाग ने कार्य किया है। किनारे खोदने के कारण भूमि का भारी कटाव होता जा रहा है। कटाव के कारण धान की लगी फसल भी बह गयी है।
सिंचाई विभाग द्वारा नई पक्की नहर बनाने के कारण कच्ची नहर की चौड़ाई कम हो गई है। इस पर पानी का बहाव किसानों की जमीन की तरफ बहुत बढ़ गया है। इससे पहले विभाग द्वारा किसानों की जमीन से लगते नहर के किनारे पर कटाव को रोकने के लिए ईंट,रोड़ा व स्टड लगा रखे थे, परंतु अब वे सब खोदाई की भेंट चढ़ा दिए गए हैं। किसानों की मांग है कि उनके खेतों का कटाव रोका जाए और हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।