यमुनानगर। विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच नागरिकों की मूल जरूरतें बड़ा मुद्दा बन रही हैं। इन्हीं में एक स्ट्रीट लाइट व्यवस्था है। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र से विपक्ष के निवर्तमान पार्षदों का आरोप है कि पांच वर्षों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था लड़खड़ाती रही।
जनप्रतिनिधियों और संबंधित अफसरों ने गत वर्षों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में सुधार के दावे किए, पर यह कागजी साबित हुए। शहर के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में स्ट्रीट लाइट के मुद्दे पर भी राजनीतिक दलों को अपना पक्ष जनता समक्ष रखना चाहिए।
उधर निगमायुक्त आयुष सिन्हा का कहना है कि शहर में जल्द 41 हजार एलईडी लाइटें लगनी है, जिससे समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा।
वार्डों के आधे क्षेत्र में शाम बाद अंधेरा-
निवर्तमान पार्षद निर्मल चौहान ने बताया कि नगर निगम यमुनानगर जगाधरी क्षेत्र में गत पांच वर्षों में 22 में से आठ वार्डों में ही एलईडी लाइटें लगीं, उनमें भी अब कई बंद हैं। अन्य 14 वार्डों में नाममात्र एलईडी लगीं, वहीं बार-बार खराब होतीं पुरानी सोडियम, सीएफएल लाइटें भी समय से ठीक नहीं हुई।इसके अलावा कई जगह दूर तक कोई लाइट नहीं है, वहां नए प्वाइंट तय कर लाइट लगाने की मांग है। इन हालात में वार्डों के आधे क्षेत्र में शाम बाद अंधेरा रहता है।
कई दावे किए, पर कोरे साबित हुए
पूर्व पार्षद नीरज राणा ने बताया कि पांच वर्षों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में सुधार के लिए कई दावे हुए, पर वह कोरे साबित हुए। दावा था कि स्ट्रीट लाइट खराब होने पर उसे शिकायत पर तुरंत ठीक कराया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
ऐसे ही दावा था कि सभी 22 वार्डों में पुरानी सोडियम व सीएफएल लाइट की जगह एलईडी लाइट लगेंगी, पर आठ वार्डों को छोड़ अन्य 14 में एलईडी लाइटें नहीं लगी।
सदन बैठकों में लगातार गूंजा मुद्दा
निवर्तमान पार्षद हरमीन कोहली ने बताया कि पूरे पांच साल के कार्यकाल में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। जबकि सदन बैठकों में पार्षद लगातार मामला उठाते रहे। उन्होंने खुद भी सदन बैठक में मोमबत्ती दिखाकर शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर सवाल उठाया।
इसके बाद भी मामले को अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। अब डेढ़ साल से सुन रहे हैं कि शहर के लिए 41 हजार लाइटें मंजूर हुई हैं, पर अभी तक अफसर इन्हें लगा नहीं पाए हैं।