यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से यात्रा बीमा दावा खारिज किए जाने को अनुचित ठहराते शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। इसमें फोरम ने बीमा कंपनी को 21,870.5 अमेरिकी डॉलर (करीब 15,83,424.20 रुपये) का भुगतान सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित शिकायतकर्ता को करने के निर्देश दिया है। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और मुकदमा खर्च के लिए 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया है।
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि सेक्टर-17 हाउसिंग बोर्ड जगाधरी निवासी कुमकुम बाला और उसके पति सतपाल अग्रवाल ने विदेश यात्रा के लिए स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी लि. से ट्रैवल प्रोटेक्ट बीमा पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 13 जुलाई 2018 से 8 जनवरी 2019 तक थी। इस पॉलिसी के तहत एक लाख अमेरिकी डॉलर का बीमा कवर लिया गया था, जिसके लिए करीब 47,908 रुपये प्रीमियम के रूप में अदा किए गए। शिकायतकर्ता 13 जुलाई 2018 को दिल्ली से एयर इंडिया की उड़ान से अमेरिका के शिकागो स्थित अरोरा शहर पहुंची थी, जहां उनका पुत्र रहता है। विदेश में प्रवास के दौरान 27 अगस्त 2018 को शिकायतकर्ता की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया और 29 अगस्त 2018 को रश कॉपले मेडिकल सेंटर, अयूरोरा में भर्ती कराया गया। वह 31 अगस्त तक अस्पताल में भर्ती रही और बाद में आठ सितंबर 2018 को दोबारा एक दिन के लिए भर्ती होना पड़ा। उपचार के बाद अस्पताल ने भारी भरकम बिल जारी किया, जिसे भारतीय मुद्रा में लगभग 15.83 लाख रुपये बताया गया।
भारत लौटने के बाद शिकायतकर्ता ने सभी मेडिकल दस्तावेज और बिल बीमा कंपनी को भेजकर दावा प्रस्तुत किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने एक अप्रैल 2019 के पत्र के माध्यम से दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने पॉलिसी लेते समय अपनी पूर्व बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, दौरे और हाइपोथायरायडिज्म की जानकारी छिपाई थी और वर्तमान बीमारी उसी का परिणाम है।
इस निर्णय के खिलाफ शिकायतकर्ता ने पहले बीमा लोकपाल चंडीगढ़ में अपील की, जिसे एक जनवरी 2020 को खारिज कर दिया गया। नीरज वालिया ने बताया कि इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम में पहुंचा। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि बीमा लेते समय कोई तथ्य नहीं छिपाया गया था और उच्च रक्तचाप आज के समय में सामान्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। वहीं बीमा कंपनी अपने आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर पाई। फोरम ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बीमा कंपनी यह सिद्ध करने में असफल रही कि शिकायतकर्ता को पॉलिसी लेने से पहले संबंधित गंभीर बीमारियां थीं या उनका इलाज चल रहा था। रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उक्त बीमारियां हाइपोनेट्रेमिया का प्रत्यक्ष कारण थीं। साथ ही फोरम ने यह भी माना कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी करने से पहले आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण नहीं कराया, जो उसकी जिम्मेदारी थी। फोरम ने कहा कि बीमा कंपनी का यह आचरण सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। बिना पर्याप्त आधार के दावा खारिज करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। फैसले में बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। फोरम ने यह भी कहा कि बीमा का उद्देश्य आपात स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देना है और कंपनियों को इस सिद्धांत का पालन करना चाहिए। संवाद