संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून में गत वर्षों की तरह शहर में जलभराव के हालात बनने के आसार हैं। एक ओर नालों की सफाई धीमी गति में है, वहीं अवैध कब्जे भी अड़चन बने हैं। नाले गंदगी से लबालब हैं। नालों के स्लैब व उनके साथ छोड़ी जमीन पर रसूखदारों के कब्जे हैं।
जगाधरी में रामलीला भवन, दुर्गा गार्डन, यमुनानगर में लाजपत नगर, विजय कॉलोनी में ऐसे कई कब्जे हैं। इससे जल निकासी में बाधा उत्पन्न होने के साथ नालों की सफाई भी चुनौती है, बावजूद इसके वर्षों से कार्रवाई के बजाय अफसर नोटिस देने का खेल कर रहे हैं।
डीसी पार्थ गुप्ता व नगर निगम आयुक्त अखिल पिलानी के निरीक्षण में बुधवार को भी लोगों ने नालों में कब्जे की बात बताई थी। तब डीसी ने नगर निगम अफसरों को कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही पांच जून तक नालों की प्रथम चरण की सफाई पूरे करने के निर्देश दिए। टीम ने वीरवार को शहर के नालों का जायजा लिया। खासकर यमुनानगर व जगाधरी दोनों शहरों को मानसून में जलभराव की पीड़ा देने वाले बड़े नाले की स्थिति देखी। जगाधरी के गौरी शंकर मंदिर से रामलीला भवन व मछली बाजार, सेक्टर-17, लाजपत नगर, विजय कॉलोनी तक नाला जगह-जगह गंदगी से अटा पाया। लाजपत नगर, विजय कॉलोनी में लोगों ने नाले व उसके साथ लगतजमीन पर कब्जे भी गिनाए।
स्थानीय निवासी राजेश , सुखवेंद्र, राजू ने बताया कि 15-20 साल पहले नाला 10-15 फीट चौड़ा था। अब सात-आठ फीट चौड़ा रह गया हैं। क्योंकि नाले के साथ लगते घरों के लोगों ने नाले के साथ छोड़ी जमीन से लेकर नाले के हिस्से की जमीन पर भी कब्जे कर लिए हैं।
कई लोगों ने नाले की जमीन से मकान का विस्तार कर लिया या उस पर दुकानें बना ली है। कई लोगों ने शौचालय बना लिए, जिनके गंदे पानी की निकासी के लिए पाइप भी नाले की ओर छोड़ दिए हैं। विजय कॉलोनी के साथ शहर के औद्योगिक क्षेत्र में भी नाले गंदगी से अटे हैं। यही अन्य नालों की स्थिति है।
नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नालों पर जहां अवैध कब्जा है, वहां निरीक्षण कर कार्रवाई करें। साथ ही नालों की सफाई तय समय पर पूरी कराएं। - पार्थ गुप्ता, डीसी, यमुनानगर।