यमुनानगर। मानसून शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग सभी खराब डोजर को ठीक करने और पानी में सोडियम हाइपोक्लोराइट मिलाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखता है। ऐसा ही पत्र इस साल एक जुलाई को स्वास्थ्य विभाग ने लिखा था। इसके बावजूद इस पत्र को जनस्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। ट्यूबवेलों के जो खराब डोजर हैं, उन्हें ठीक नहीं कराया गया और न ही दवा की सप्लाई पर कोई नजर रखी गई। इस कारण शहर के कॉलोनियों में डायरिया व पीलिया फैलना शुरू हो गया है। कॉलोनियों में पानी के सैंपल फेल आ रहे हैं तो कहीं अनफिट मिल रहा है। इसके बावजूद जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने यह पत्र जनस्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ डीडीपीओ व सभी खंडों के बीडीपीओ को लिखा था। जिसमें साफ-साफ कहा गया था कि बारिश के मौसम में जल जनित बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। जिले में हर साल उल्ट, दस्त, पीलिया के केस पाए जाते हैं। ऐसे में बीमारियों से बचाव के लिए पेयजल में उपयुक्त मात्रा में क्लोरिनेशन होनी आवश्यक है। इतना ही नहीं जांच के दौरान ट्यूबवेलों पर रखे डोजर खराब पाए जाते हैं। इस कारण बीमारियां फैलती हैं। पत्र के माध्यम से खराब डोजर को ठीक करने तथा पानी में सोडियम हाइपोक्लोराइट मिलाने की मांग की थी। इतना ही नहीं पत्र की एक-एक प्रति डीसी यमुनानगर व स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को भी भेजी गई थी, परंतु जनस्वास्थ्य विभाग व अन्य अधिकारियाें ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। डोजर ठीक करने का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा समय पर डोजर को ठीक नहीं किया जाता। जनस्वास्थ्य विभाग के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारी भी ठेकेदार पर मेहरबान हैं, जिस कारण उनके हौसले बुलंद हैं। वह मनमर्जी से काम करते हैं।
अब ठीक कराए जा रहे डोजर
अमर उजाला द्वारा ट्यूबवेलों पर लगे डोजर के खराब होने और सोडियम हाइपोक्लोराइट नहीं होने का मामला उजागर किए जाने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। इसके बाद अब ट्यूबवेलों पर खराब डोजर को ठीक करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो देर रात तक ट्यूबवेलों पर डोजर को ठीक कर रहे हैं। वहीं दवा सप्लाई की मात्रा भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां पर केवल 30 लीटर दवा दी जा रही थी वहां अब 60 लीटर दवा दे रहे हैं। अवगत हो कि हर माह ट्यूबवेल पर 120 लीटर दवा देनी जरूरी है, परंतु इसमें से आधी दवा ही ट्यूबवेलों पर दी जा रही थी।
विभाग को पत्र लिखा गया था : डॉ. वागीश
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वागीश गुटैन ने बताया कि मानसून में डायरिया व पीलिया फैलने का खतरा रहता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिख कर खराब पड़े डोजर को ठीक कराने तथा पानी में नियमित रूप से सोडियम हाइपोक्लोराइट मिलाने की मांग की गई थी।